मोदी सरकार में जिन मंत्रियों को हटाया गया है उनमें एक नाम दिल्ली से सांसद रहे डॉ हर्षवर्धन का भी है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की कैबिनेट से विदाई का कारण कोरोनाकाल में स्वास्थ्य व्यवस्था के चरमराने के साथ ही वैक्सीनेशन की कमी और अस्पतालों में बेड की कमी के चलते सरकार की किरकिरी होना है।
वहीं डॉ हर्षवर्धन के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार पर तंज कसा है। डॉ हर्षवर्धन के इस्तीफे पर पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सारी मीटिंग पीएम करते हैं और निशाना उन्हें बना रहे हैं। ममता के अलावा कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। जयराम रमेश ने डॉ हर्षवर्धन के इस्तीफे पर कहा कि पुअर डॉ. हर्षवर्धन, एक अच्छे इंसान को उच्चतम स्तर पर विफलताओं के लिए बलि का बकरा बनाया गया है।
हर्षवर्धन पेशे से एक डॉक्टर हैं और उनके पास स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ–साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी भी थी। उन्हें दूसरी बार स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया था और फिर वापिस भी ले लिया गया है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने मंत्रिपरिषद का एक बड़ा विस्तार और फेरबदल करने से कुछ घंटे पहले डॉ हर्षवर्धन का इस्तीफा आया है। मोदी सरकार की कैबिनेट की नई टीम में 43 नए सदस्यों के शपथ लेने की उम्मीद है।
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