BJP: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ सरकार परिवर्तन का संकेत नहीं देते, बल्कि ममता बनर्जी द्वारा पिछले डेढ़ दशक में बनाई गई राजनीतिक व्यवस्था में एक ढांचागत दरार पैदा करते हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए ये पुनर्गठन का सबसे महत्वपूर्ण दौर है।2011 से बंगाल की राजनीतिक रणनीति को परिभाषित करने वाली इस पार्टी के लिए ये हार सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि व्यवस्थागत है। बीजेपी की इस निर्णायक जीत से यह स्पष्ट है कि केंद्रीकृत सत्ता, कल्याणकारी योजनाओं के वितरण और कड़े नियंत्रण वाले संगठनात्मक ढांचे पर आधारित व्यवस्था में सेंध लगाई गई है।BJP:
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आंकड़े इस उथल-पुथल की गहराई को रेखांकित करते हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी का वोट शेयर 38 फीसदी से बढ़कर लगभग 44.8 फीसदी हो जाना मजबूती और विस्तार दोनों का संकेत है। इसके विपरीत, टीएमसी का वोट शेयर उसी चुनाव में 48 फीसदी से गिरकर लगभग 41.7 फीसदी हो जाना उसके सामाजिक गठबंधन के लगातार कमजोर होने को दर्शाता है – विशेष रूप से अर्ध-शहरी क्षेत्रों में और उन वर्गों में जिन्होंने 2021 की उसकी जीत में अहम भूमिका निभाई थी।BJP:
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पश्चिम बंगाल की जीत के साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जीत का रिकॉर्ड रहा बरकरार।पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक जीत पर फिर दिखा मुख्यमंत्री का सफल नेतृत्व।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बंगाल की 6 विधानसभा की प्रचार प्रक्रिया में निभाई थी ज़िम्मेदारी।मोयना विधानसभा में रोड़ शो तो वहीं श्रीरामपुर, चंपदनी, चंदीताला, जंगीपारा और उत्तरपारा के उम्मीदवारों का कराया था नामांकन।6 में से 4 विधानसभा में पार्टी को मिली अभूतपूर्व सफलता।इन 6 विधानसभाओं में लगभग 70 प्रतिशत की सफलता में मुख्यमंत्री और हरियाणा मॉडल की रही छाप।BJP:
