BRICS Parliamentary Forum: भारत की मेजबानी में 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का आगाज हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन भाषण में आतंकवाद और वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए संसदों की एकता का आह्वान किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों से मुलाकात की है। BRICS Parliamentary Forum
संसद भवन के संविधान सदन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में आज सुबह से 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम की शुरुआत हो गई है। दो दिवसीय इस कार्यक्रम की मेजबानी भारत कर रहा है। फोरम का मुख्य विषय है— “जन-केंद्रित विकास हेतु संसदों को मजबूत बनाना”।
लोकसभा अध्यक्ष और फोरम के अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन भाषण देते हुए कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष,युद्ध,आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां किसी एक देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहतीं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में संवाद,कूटनीति और आपसी सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है। BRICS Parliamentary Forum
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ओम बिरला ने कहा कि “संसदें आपसी समझ और विश्वास को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने और वैश्विक चुनौतियों के शांतिपूर्ण समाधान में विशेष भूमिका निभा सकती हैं।” BRICS Parliamentary Forum
ओम बिरला ने कहा कि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है और दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स समिट में सर्वसम्मति से अपनाए गए संयुक्त वक्तव्य की सराहना की और कहा कि अब इन प्रतिबद्धताओं को ठोस नतीजों में बदलना जरूरी है। बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स को “समाधानों का इकोसिस्टम” बनाने पर जोर दिया है। सफलता सिर्फ चर्चाओं से नहीं, बल्कि नतीजों से मापी जाएगी। BRICS Parliamentary Forum
ब्रिक्स संसदीय फोरम के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए।पीएम मोदी ने ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के स्पीकर्स और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की और संसदीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।
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फोरम में 11 ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल हुए हैं। दो दिनों के दौरान लचीलापन (Resilience), नवाचार (Innovation), सहयोग (Cooperation) और सतत विकास (Sustainability) जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हो रहा है।
कार्यक्रम का समापन 27 अक्टूबर को संयुक्त वक्तव्य अपनाने के साथ होगा। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भी अपना संबोधन दिया। लोकसभा के महासचिव ने स्वागत भाषण दिया। बहरहाल ब्रिक्स संसदीय फोरम भारत की संसदीय कूटनीति को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है। ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संसदों की भूमिका अब और अहम हो गई है।
