CBSE ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए एक जुलाई से 3 भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया

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CBSE ने एक जुलाई से कक्षा नौ के छात्रों के लिए कम से कम दो मूल भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य कर दिया है। CBSE द्वारा जारी एक परिपत्र से यह जानकारी मिली।

यह कदम केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा अपनी अध्ययन योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या प्रारूप (एनसीएफ-एसई)-2023 के अनुरूप करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह परिपपत्र 15 मई को जारी किया गया।

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परिपत्र के अनुसार विदेशी भाषा का चयन करने वाले छात्र दो भारतीय मूल भाषाओं का अध्ययन करने के बाद ही इसका तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चयन कर सकते हैं। परिपत्र में कहा गया है, ‘‘एक जुलाई, 2026 से कक्षा नौ के लिए तीन भाषाओं (आर1, आर2, आर3) का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो मूल भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।’’

CBSE ने कहा कि छात्रों पर अनावश्यक दबाव कम करने और सीखने पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए कक्षा 10 में आर3 के लिए कोई बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसमें कहा गया है, ‘‘आर3 के सभी मूल्यांकन पूरी तरह से विद्यालय-आधारित और आंतरिक होंगे। आर3 में छात्रों का प्रदर्शन CBSE प्रमाणपत्र में विधिवत रूप से दर्शाया जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि आर3 के कारण किसी भी छात्र को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। आंतरिक मूल्यांकन के लिए नमूना प्रश्न पत्र और मानदंड बोर्ड द्वारा शीघ्र ही साझा किए जाएंगे।’’

इसमें आगे कहा गया है कि बोर्ड ने विद्यालयों से 30 जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर कक्षा छह से नौ तक के आर3 भाषा पाठ्यक्रमों को अद्यतन करने को भी कहा है।

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परिपत्र में कहा गया है कि मूल भारतीय भाषा के योग्य शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे विद्यालय अंतरिम उपाय अपना सकते हैं, जैसे कि अंतर-विद्यालय संसाधन साझाकरण, वर्चुअल या मिश्रित शिक्षण सहायता, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों और योग्य स्नातकोत्तर शिक्षकों की नियुक्ति।

CBSE ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएनएसएन) को छूट प्रदान की जाएगी, जबकि भारत लौटने वाले विदेशी छात्रों को दो मूल भारतीय भाषाओं के अध्ययन की आवश्यकता से मामले-दर-मामले के आधार पर छूट मिल सकती है।

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