CII Innovative Farmers Meet के लाडवा में समापन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों को आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, मिट्टी की सेहत और बाजार की जरूरतों के अनुरूप खेती अपनाने पर जोर दिया।
न्यूज डेस्क: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लाडवा में आयोजित CII के पांचवें Innovative Farmers Meet के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र की 48 कोस की पावन धरा को नमन किया और कार्यक्रम में मौजूद अन्नदाता किसानों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि सोनीपत और जींद के बाद इस आयोजन का समापन लाडवा में हो रहा है, जहां कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, उद्योग प्रतिनिधियों और नई तकनीक उपलब्ध कराने वाले लोगों को एक मंच पर आने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने सम्मानित किए गए प्रगतिशील किसानों को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि CII वर्ष 1994 से एग्रोटेक इंडिया के माध्यम से किसानों, उद्योगों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को जोड़ने का काम कर रही है। एग्रोटेक किसानों को आधुनिक तकनीक, कृषि मशीनरी, नए विचारों और टिकाऊ खेती के तरीकों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कार्यक्रम में लगी प्रदर्शनी का भी उल्लेख किया, जहां कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनरी और तकनीक प्रदर्शित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर कृषि की लागत और अवसरों पर पड़ता है। ऐसे में किसानों को मिट्टी की सेहत पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। फसल चक्र, जैविक पदार्थ और वैज्ञानिक सलाह के जरिए मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने पर उन्होंने जोर दिया।
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नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसान समूहों, सहकारी समितियों और किराए पर कृषि मशीनरी उपलब्ध कराने वाले केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्योग जगत से फसल अवशेषों से उपयोगी उत्पाद और ऊर्जा तैयार करने की संभावनाओं पर आगे आने का आह्वान किया। साथ ही फसल विविधीकरण पर खुले मन से विचार करने और किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO के जरिए छोटे किसानों को सामूहिक ताकत देने की बात कही। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना जरूरी है।CII
मुख्यमंत्री ने हरियाणा में किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से कुरुक्षेत्र जिले में 2000 एकड़ के क्लस्टर में प्राकृतिक खेती शुरू की जाएगी। पराली के उचित प्रबंधन और उसकी गांठ बनाने के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार कस्टम हायरिंग सेंटरों को 80 प्रतिशत सब्सिडी देकर 6794 केंद्र स्थापित किए गए हैं और इन पर अब तक 1017 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। उन्होंने बताया कि सब्जियों और फलों के लिए भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य निर्धारित किए गए हैं।CII
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मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों से भी किसानों तक तकनीक को सरल तरीके से पहुंचाने की अपील की। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाली उपयोगी खोजों को किसानों के खेत तक आसान भाषा में पहुंचाया जाए। वहीं उद्योग प्रतिनिधियों से मशीनरी के प्रदर्शन के साथ उसकी वास्तविक लागत और सेवा व्यवस्था की जानकारी देने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन की उपलब्धि तब और बढ़ेगी, जब यहां सीखी गई कोई बात किसी गांव की खेती को बेहतर बनाने में काम आएगी।
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