राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी को लेकर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने बोला तीखा हमला

राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी को लेकर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने कहा कि​”आस्था के नाम पर देशवासियों के साथ बड़ा विश्वासघात” हुआ है। उन्होंने ​राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग कर सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में जांच की मांग की है।

राम मंदिर निर्माण के चंदे और जमीन खरीद में कथित घोटालों को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर सीधा और करारा प्रहार किया है।”

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अशोक गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए कहा कि राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे में जो चोरी और घोटाले हुए हैं, उसकी गूंज आज देश के हर गांव और हर घर तक पहुंच गई है उन्होंने कहा कि लगभग 40 साल तक विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस और बीजेपी ने राम मंदिर के नाम पर यात्राएं निकालीं, जिसके दम पर वे सत्ता में आए लेकिन आज जब आम जनता, जिसने अपनी गाढ़ी कमाई से ₹100 से लेकर करोड़ों रुपये तक दान दिए, उन्हें पता चल रहा है कि उनकी आस्था के साथ धोखा हुआ है।

​अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि”2 करोड़ की जमीन को ट्रस्ट ने 18 करोड़ में खरीद लिया। ये तो बस एक उदाहरण है, लोग तो इससे भी बड़े घोटालों की बात कर रहे हैं। इस पवित्र काम में भी इतनी बड़ी चोरी हो जाए, तो यह देशवासियों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है।

कांग्रेस नेता गहलोत ने ट्रस्ट की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष खुद को ‘डमी’ बता रहे हैं और कह रहे हैं कि चेकों पर उनके हस्ताक्षर ही नहीं हैं। इतना ही नहीं, चोरी पकड़े जाने से पहले के सीसीटीवी फुटेज तक हटा दिए गए। निर्माण समिति के अध्यक्ष का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि यह सिर्फ चोरी नहीं, बल्कि सरेआम ‘डकैती’ है।

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​उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी (SIT) पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि इसमें सिर्फ यूपी के सरकारी अधिकारी शामिल हैं, इसलिए देश की जनता को इस जांच पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। कांग्रेस नेता गहलोत ने कई मांग की है। इनमें वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाए।​सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या रिटायर्ड जज की देखरेख में एक स्वतंत्र जांच कराई जाए।

अशोक गहलोत ने कहा कि ​इलेक्टोरल बॉन्ड की तरह राम मंदिर में आए काइंड (सामान) और कैश (नकद) के चंदे का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक (पारदर्शी) किया जाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर देश के हर नागरिक के चंदे से बना है, यह किसी एक पार्टी की बपौती नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि नया ट्रस्ट बनाकर उसमें धर्माचार्यों और शंकराचार्यों को शामिल किया जाए। गहलोत ने साफ कर दिया है कि जब तक इस मामले की मॉनिटरिंग सुप्रीम कोर्ट नहीं करेगा और ट्रस्ट को भंग नहीं किया जाएगा, तब तक देश के करोड़ों राम भक्तों का विश्वास बहाल नहीं हो सकता।

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