CSPOC : भारतीय संसद 14 से 16 जनवरी 2026 तक 28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस CSPOC की मेजबानी करने जा रही है। लोकसभा अध्यक्ष एवं बिरला की अगुवाई में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स भाग लेंगे।28वीं कॉमनवेल्थ स्पीकर्स एंड प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस CSPOC 14 से 16 जनवरी को आयोजित होगी। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला इस कॉन्फ्रेंस के चेयरपर्सन होंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस सम्मेलन को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए महत्वपूर्ण घोषणा की है।
सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जनवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे संसद भवन परिसर के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल (समविधान सदन) में करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले अक्टूबर 2023 में G20 संसदीय स्पीकर्स (P20) समिट का भी उद्घाटन किया था।CSPOC की स्थापना 1969 में कनाडा के तत्कालीन हाउस ऑफ कॉमन्स स्पीकर ऑनरेबल लूसियन लामुरो द्वारा की गई थी। तब से कनाडा इसकी सेक्रेटेरिएट प्रदान करता आ रहा है। यह फोरम कॉमनवेल्थ के स्वतंत्र देशों के राष्ट्रीय संसदों के स्पीकर्स को एक मंच देता है, जहां वे संसदीय प्रक्रियाओं, लोकतंत्र को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जानकारी दी है कि इस बार के सम्मेलन में रिकॉर्ड संख्या में भागीदारी की उम्मीद है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हाल ही में घोषणा की कि 56 आमंत्रित देशों में से 42 देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे प्रमुख देश शामिल हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी होगी। हालांकि इस सम्मेलन में पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल नहीं होंगे।स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि पाकिस्तान इस सम्मेलन में शामिल नही होगा। वही बांग्लादेश में फिलहाल संसद भंग है ऐसे में उसका भी प्रतिनिधि इस कांफ्रेंस में नहीं होगा।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया किकॉन्फ्रेंस का मुख्य फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सोशल मीडिया के संसदीय कार्यप्रणाली में उपयोग पर होगा। साथ ही, संसदों को अधिक समावेशी, पारदर्शी और प्रभावी बनाने, जलवायु परिवर्तन, साइबर क्राइम जैसी वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा होगी। लोकसभा अध्यक्ष सम्मेलन इस मौके पर भारतीय संसद में 22 भाषाओं में अनुवाद और AI के इस्तेमाल को लेकर महत्त्वपूर्ण बयान दिया है।यह आयोजन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक तकनीकी प्रगति और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा।यह सम्मेलन कॉमनवेल्थ देशों के बीच संसदीय सहयोग को मजबूत करने और लोकतंत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
