Odisha: ओडिशा में एक दिहाड़ी मजदूर की बेटी और एक सुरक्षा गार्ड के बेटे ने नीट परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इसका श्रेय जिंदगी फाउंडेशन के स्पेशल 20 को जाता है, जो वंचित वर्ग के लोगों को शिक्षा में प्रगति करने में मदद करता है।रानी हेम्ब्रम ने कई मुश्किलों को पार करते हुए नीट पास करके मेडिकल कोर्स के लिए क्वालीफाई किया। उसकी मां एक दिहाड़ी मजदूर है और जब वह दसवीं कक्षा में थी, तब उसके पिता का देहांत हो गया था।
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इसी तरह, पुरी के एक सुरक्षा गार्ड के बेटे रघुनाथ बेहरा ने नीट परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक तीन हासिल की है।वे दोनों अजय बहादुर सिंह का शुक्रिया अदा करते हैं जो जिंदगी फाउंडेशन चलाते हैं, जो हर साल वंचित वर्गों से आने वाले 20 प्रतिभाशाली छात्रों को चुनता है और उन्हें देश की शीर्ष मेडिकल परीक्षा में सफल होने के लिए तैयार करता है। फाउंडेशन उन्हें मुफ्त भोजन, आवास और कोचिंग देता है।

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अजय बहादुर सिंह, ज़िंदगी फाउंडेशन के संस्थापक: अब तक मेरे जैसे गरीब, लाचार और बेबस बच्चे, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े होते हैं, उन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। अब तक ज़िंदगी फाउंडेशन 143 बच्चों को नीट में क्वालिफाई करवा चुका है और 100 से ज्यादा बच्चे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। बहुत सारे बच्चे अब डॉक्टर बन चुके हैं और प्रैक्टिस कर रहे हैं। मुझे बहुत खुशी होती है जब मैं सोचता हूं कि मैंने हमेशा बच्चों से कहा है ‘बेटा, तुम्हारा पॉकेट देखकर मैं तुम्हें नहीं पढ़ा रहा हूं। तुम्हारे लिए रहने, खाने, पीने, पढ़ाई, लिखाई और कोचिंग इन सबकी व्यवस्था मैं नि:शुल्क दे रहा हूं। लेकिन तुम जीवन में जब किसी लाचार या बेबस व्यक्ति का इलाज करो, तो कभी उसकी पॉकेट देखकर इलाज मत करना।
रघुनाथ बेहरा: इस साल नीट 2025 में मेरा पीडब्ल्यूडी कैटेगरी में ऑल इंडिया रैंक 3 आया है। तैयारी के समय यह ज्यादा चुनौतीपूर्ण था, लेकिन ‘जिंदगी फाउंडेशन’ के मदद से यह संभव और आसान हो पाया। क्योंकि वे अच्छे से मतलब कोचिंग स्टाफ, छात्रावास की सुविधाएं और पूरा माहौल बहुत अच्छा है। सभी लोगों के सहयोग से यह संभव हो पाया है अच्छे से।”
