Delhi: आज भारत और नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों के लिए एक गौरवशाली दिन है। नेपाल के ललितपुर में स्थित ऐतिहासिक जेष्ठ वर्ण महाविहार के जीर्णोद्धार कार्य को प्रतिष्ठित ‘यूनेस्को एशिया पैसिफिक अवार्ड ऑफ मेरिट 2025’ से सम्मानित किया गया है। यूनेस्को ने 20 फरवरी 2026 को आधिकारिक तौर पर इस पुरस्कार की घोषणा की। आपको बता दें कि यह पूरी परियोजना भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित थी, जिसे विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से सहयोग दिया गया था।Delhi:
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त्रासदी से पुनरुत्थान तक: 2015 के विनाशकारी भूकंप ने नेपाल की कई सांस्कृतिक धरोहरों को नुकसान पहुँचाया था। ललितपुर का यह दो-मंजिला महाविहार भी इसकी चपेट में आया और इसकी ऊपरी मंजिल पूरी तरह ढह गई थी।भारत का सहयोग: भारत सरकार ने पुनर्निर्माण के अपने वादे को निभाते हुए इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी INTACH (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) को सौंपी। दिसंबर 2019 में हस्ताक्षरित समझौते के तहत, INTACH ने डिजाइन और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का जिम्मा संभाला।Delhi:
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विशेषता:इस संरक्षण कार्य की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि जीर्णोद्धार के दौरान भी महाविहार में होने वाली दैनिक पूजा और सामुदायिक गतिविधियाँ कभी नहीं रुकीं। इसे ‘लिविंग हेरिटेज’ के रूप में सुरक्षित रखा गया।एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक “INTACH का यह योगदान केवल भूकंप के बाद की रिकवरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नेपाल में विरासत संरक्षण के भविष्य के लिए एक अहम कदम साबित होगा।”पिछले साल 22 मार्च 2024 को इस साइट का उद्घाटन कर इसे स्थानीय समुदाय को सौंप दिया गया था। आज मिला यह यूनेस्को पुरस्कार न केवल वास्तुशिल्प की उत्कृष्टता का प्रमाण है, बल्कि भारत-नेपाल के अटूट सांस्कृतिक संबंधों की एक नई कहानी भी कहता है।Delhi:
