Delhi: पश्चिमी एशिया में गहराते युद्ध के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों की निकासी और उनकी सुरक्षा पर पूछे गए सवाल के जवाब में भारत की कूटनीतिक सक्रियता का उल्लेख किया है।इस सवाल के जवाब में कि क्या”क्या ईरान ने भारत जाने वाले जहाजों को सुरक्षित निकलने की इजाजत दे दी है?”विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जवाब दिया है। Delhi:
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक ”पिछले कुछ दिनों में भारत के विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार उच्च स्तरीय बातचीत हुई है। हमारी अंतिम चर्चा विशेष रूप से ‘शिपिंग की सुरक्षा’ और ‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा’ से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्रित थी। हालांकि, जमीनी स्थिति को देखते हुए, इस वक्त किसी भी अंतिम नतीजे पर पहुँचना या कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। Delhi:
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इस बयान के जरिए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता जाहिर की है। भारत और ईरान के बीच पिछले कुछ दिनों में 3 बार उच्च स्तरीय संवाद हुआ है।इसमे ऊर्जा सुरक्षा और भारत की शिपिंग सुरक्षा को लेकर अहम चर्चा हुई है भारत के लिए हॉर्मुज़ का रास्ता क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।Delhi:
फिलहाल सतर्कता के तहत सरकार ने ‘रुको और देखो’ Wait and Watch की नीति अपनाई है, क्योंकि स्थिति अभी भी अस्थिर है।वही विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि ईरान के 3 वॉरशिप ने 28 फरवरी को डॉक करने की रिक्वेस्ट की है। ईरान का वॉरशिप लवन 4 मार्च को कोच्चि में डॉक हुआ। इस वॉरशिप के नाविकों को वीज़ा दे दिया गया है और वे इंडियन नेवी की फैसिलिटी में हैं। Delhi:
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के लिए रिक्वेस्ट मिली हैं।जाहिर है, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और समुद्र में फँसे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कोई भी ढील नहीं देना चाहता। ईरान के साथ चल रही यह बातचीत आने वाले दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। Delhi:
