Gujarat: प्रधानमंत्री मोदी 11 जनवरी को इस चार दिवसीय उत्सव के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इस पर्व के माध्यम से न केवल आध्यात्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की एक बड़ी श्रृंखला शुरू की जाएगी। यह कार्यक्रम सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास और आधुनिक भारत के उसके महत्व को दर्शाने के लिए डिजाइन किया गया है।पीएम मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष लेख भी लिखा है।
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इस लेख में उन्होंने सोमनाथ मंदिर को भारतीय अस्मिता का केंद्र बताया है। यह वही मंदिर है जिसे इतिहास में कई बार नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार यह अपनी राख से उठ खड़ा हुआ। पीएम ने अपने लेख में इसी ‘स्वाभिमान’ और ‘पुनरुद्धार’ की भावना को शब्दों में पिरोया है।
पीएम मोदी ने लिखा कि- “जय सोमनाथ। 2026 में सोमनाथ पर पहले हमले को 1000 साल पूरे हो जाएंगे।बाद में बार-बार हमले होने के बावजूद, सोमनाथ आज भी शान से खड़ा है,ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमनाथ की कहानी भारत माता के अनगिनत बच्चों के अटूट साहस की कहानी है जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की है।वही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बीजेपी प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक’ है आज का विषय भारत की पहचान, अस्मिता, अस्तित्व और उसके भविष्य से संबंधित है।
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सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हर देश के इतिहास में कुछ ऐसे मोड़ और तारीखें होती हैं, जो भले ही पीड़ादायक हों, लेकिन उन्हें याद रखना जरूरी होता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।पीएम मोदी सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं और उनके मार्गदर्शन में मंदिर परिसर का लगातार कायाकल्प हो रहा है। 11 जनवरी को होने वाला दौरा काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
