Haryana: यमुनानगर ज़िले के मुकारमपुर गांव में बायोगैस प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब उग्र होता जा रहा है। किसान यूनियन के साथ 15 गांवों के लोग मौके पर पहुंचे और एसडीएम रोहित कुमार को धरातल की वास्तविक सच्चाई बताई। यमुनानगर के मुकारमपुर गांव में बायोगैस प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब तेज हो गया है। बुधवार को 15 से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीण किसान यूनियन के बैनर तले मौके पर पहुंचे और बायोगैस प्लांट के निर्माण कार्य को न होने की खुली चेतावनी दी। Haryana:
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ग्रामीणों ने प्रशासन से की ये डिमांड Haryana:
ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों और पर्यावरणीय मानकों को दरकिनार कर जबरन यह प्लांट थोपा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बायोगैस प्लांट से निकलने वाली गैस और कचरे के कारण आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं, यहां तक कि कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि यमुनानगर के खजूरी गांव में जिस जमीन को इस प्लांट के लिए चिन्हित किया गया था, उसे वहीं बनाया जाए, न कि मुकारमपुर और आसपास के आबादी वाले इलाकों के बीच शिफ्ट किया जाए। Haryana:
गौरतलब है कि इसी बायोगैस प्लांट का 10 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यमुनानगर दौरे के दौरान शिलान्यास किया था, लेकिन अब स्थानीय लोग इस परियोजना के खिलाफ खुलकर सड़क पर उतर आए हैं। यह बायोगैस प्लांट 100 करोड़ की लागत से बनना था जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया है उसके बाद से ही यहां विरोध के स्वर उठने लगे थे। अब देखना होगा ग्रामीणों का विरोध कितना असरदार रहता है। Haryana:
बाढ़ को लेकर ग्रामीणों ने कही ये बात
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि बायोगैस प्लांट के निर्माण से राक्षसी नदी को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जल स्रोतों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसान यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने ग्रामीणों की मांगों को अनसुना किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और यह विरोध जिला स्तर से राज्य स्तर तक पहुंच सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार मानसून सीजन में राक्षसी नदी अपने शबाब पर थी अगर इस नदी पर बायोगैस संयंत्र स्थापित हो गया तो कई गांव जलमग्न हो जाएंगे।
