HP: महिलाओं को आर्थिक आजादी दे रही है ‘हैंडलूम विलेज’ शरण गांव की पारंपरिक कला

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HP: हिमाचल प्रदेश के शरण गांव में कुल्लू की पारंपरिक कला महिलाओं के लिए रोजगार के नए मौके खोल रही है। इससे पहाड़ी समुदाय को नई पहचान मिल रही है। शरण गांव को 2020 में ‘हैंडलूम विलेज’ घोषित किया गया था। इसके बाद यहां बुनाई का सदियों पुराना काम देश भर के बाजारों तक पहुंच गया। इससे गांव के लोगों को आर्थिक आजादी भी मिल रही है, और उन्हें किसी के सहारे की जरूरत भी नहीं पड़ रही। वो अपनी आजिविका अपने से कमा रहें हैं। HP

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पारंपरिक पट्टू शॉल, स्टोल, टोपियां और ऊनी सामान पहले मुख्य रूप से निजी इस्तेमाल के लिए बनाए जाते थे। अब ये स्वयं-सहायता समूहों और कौशल-विकास प्रशिक्षण के जरिये बड़े पैमाने पर बन रहे हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक आजादी मिल रही है। जो सामान कभी घर-घर की परंपरा हुआ करते थे, अब वे महिला सशक्तिकरण का जरिया हैं। शरण गांव की महिलाएं संस्कृति, पहचान और टिकाऊ आजीविका को एक साथ बुन रही हैं।HP

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