जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने बीते शनिवार को ‘‘बेहद आपत्तिजनक सामग्री’’ वाली दो विवादित किताबों की जांच के आदेश दिए और इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया। साथ ही एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी। यह कार्रवाई बीजेपी, कांग्रेस और अन्य राजनैतिक दलों की तरफ से इस पुस्तक पर यह आरोप लगाए जाने के बाद की गई कि जिसमें कथित तौर पर अलगाववाद का ‘महिमामंडन’ किया गया है।
स्कूल शिक्षा विभाग के एक आदेश में कहा गया है कि दोनों पुस्तकों को शुक्रवार को वापस ले लिया गया। विवादित पुस्तक ‘‘पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जेएंडके’’ के लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं और इसे ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू ने प्रकाशित किया है। वहीं ‘‘ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’’ के लेखक सुशांत गिरी हैं, इसे अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है।
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आदेश के अनुसार, पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में और दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में भेजी गई थीं। आदेश में कहा गया है, ‘‘विभाग के संज्ञान में आया है कि इन पुस्तकों में अत्यंत अनुचित सामग्री है। यह स्पष्ट है कि उप-समिति सीरीज-4 के सदस्यों और पर्यवेक्षी अधिकारियों ने ऐसी पुस्तकों की अनुशंसा करते समय गंभीर लापरवाही, काम में चूक और आवश्यक सावधानी बरतने में विफलता दिखाई, जिनमें अलगाववाद से संबंधित ऐसी सामग्री थी, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।’’
आदेश में कहा गया है कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए उप-समिति के सदस्य ऐसी गंभीर चूक और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लगते हैं जो सरकारी कर्मचारियों के लिए उचित नहीं है। इसलिए जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के नियम 31(1)(ए) के तहत स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों और पर्यवेक्षी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।
निलंबित अधिकारियों में फाजिल इमरान सिद्दीकी (समन्वयक, पुस्तकालय, समग्र शिक्षा), गुरजीत सिंह (सहायक समन्वयक, समग्र शिक्षा), संजीव शर्मा (प्रधानाचार्य, जीएचएसएस, कोरे पन्नू), शाजिया कौसर (अकादमिक अधिकारी, एससीईआरटी जम्मू), इम्तियाज अहमद मीर (व्याख्याता, बीएचएसएस वाथूरा, बडगाम), निरंजन शर्मा (व्याख्याता, जीएचएसएस बधात, किश्तवाड़), रेणु मेंगी (व्याख्याता, डीआईईटी जम्मू) और राजमोहिनी (व्याख्याता, जीजीएचएसएस, पुंछ) शामिल हैं।
आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान ये सभी अधिकारी स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक विभाग से संबद्ध रहेंगे। आदेश में यह भी कहा गया है कि शेख सुहैल अहमद, जो समग्र शिक्षा में पुस्तकालय समन्वयक की सहायता के लिए संविदा पर कंप्यूटर सहायक के रूप में कार्यरत थे, उनकी संविदा सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती है। उप-राज्यपाल ने इस पूरे मामले की जांच के भी आदेश दिए हैं।
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आदेश के मुताबिक, ‘‘मामले की गंभीरता और उपर्युक्त अधिकारियों के कदाचार को देखते हुए विद्युत विकास विभाग के वित्तीय आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव) अश्विनी कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जो पूरे मामले की जांच करेंगे।’’ इसके अलावा, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव रोहित शर्मा को इस मामले में ‘प्रेजेंटिंग’ अधिकारी नियुक्त किया गया है। बता दें कि ‘प्रेजेंटिंग’ अधिकारी वह होता है जो विभागीय जांच में सरकार या विभाग का पक्ष प्रस्तुत करता है। जांच अधिकारी 30 दिन में अपनी रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को सौंपेंगे।
उप-राज्यपाल ने यह भी आदेश दिया कि उपर्युक्त दोनों पुस्तकों के लेखकों और प्रकाशकों को जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित और काली सूची में डाल दिया जाए। साथ ही, उनके द्वारा लिखित या प्रकाशित किसी भी मुद्रित सामग्री को भी जम्मू कश्मीर से वापस लिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विभिन्न राजनैतिक दलों ने इन पुस्तकों की सामग्री पर आपत्ति जताई। बीजेपी ने आरोप लगाया कि किताबों में आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन किया गया है और उसने किताबों पर प्रतिबंध लगाने और जम्मू कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू को बर्खास्त करने की मांग की है।
