Madhya Pradesh: सरकारी स्कूलों के बारे में अक्सर संसाधनों की कमी की चर्चा होती है, लेकिन मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर ज़िले के गोटेगांव ब्लॉक में स्थित खमरिया के इस सरकारी स्कूल ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। जो स्कूल कभी आम सरकारी स्कूलों जैसा ही था, वह आज भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से तैयार एक क्लासरूम बन गया है। पारंपरिक ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्ट बोर्ड ने ले ली है, और डिजिटल लर्निंग रोज़ाना की पढ़ाई का अहम हिस्सा बन गई है। स्कूल में कई तरह की सुविधाएं भी हैं, जैसे अटल टिंकरिंग लैब, साइंस लैब, लाइब्रेरी, म्यूज़िक क्लास और NCC गतिविधियां।Madhya Pradesh
शिक्षकों का कहना है कि उनका ध्यान टेक्नोलॉजी को प्रैक्टिकल और एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग के साथ जोड़ने पर है, ताकि छात्र पढ़ाई के अलावा दूसरी स्किल्स भी सीख सकें। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत खुद समुदाय है। शिक्षकों का कहना है कि पिछले दस सालों में ग्रामीणों ने 65 लाख रुपये के विकास कार्यों में योगदान दिया है। एक एकड़ का स्पोर्ट्स ग्राउंड बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। आज इस स्कूल में आस-पास के गांवों से छात्र आते हैं, और कुछ परिवार तो प्राइवेट स्कूलों के बजाय इसे चुनते हैं।Madhya Pradesh
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