New Delhi: एक्टिविस्ट उमर खालिद ने दिल्ली हाई कोर्ट में ज़मानत की अर्ज़ी दी है। यह अर्ज़ी फरवरी 2020 में शहर के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हुए दंगों के पीछे की “बड़ी साज़िश” से जुड़े UAPA (आतंकवाद-रोधी कानून) मामले में ज़मानत पाने के लिए है। ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को खालिद की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी थी। इस फैसले को चुनौती देने वाली खालिद की अपील पर शुक्रवार को जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच सुनवाई करेगी।New Delhi
सितंबर 2020 में गिरफ्तार किए गए खालिद पर फरवरी 2020 के दंगों के “मास्टरमाइंड” में से एक होने के आरोप में UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम) के तहत मामला दर्ज किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। एक्टिविस्ट शरजील इमाम, खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य लोगों पर भी इस बड़ी साज़िश के मामले में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में केस दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जांच कर रही है।
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4 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने उनकी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि उसके पास सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है, इसलिए वह न तो अर्ज़ी पर विचार कर सकता है और न ही उन्हें कोई राहत दे सकता है। 2 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने खालिद को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था।New Delhi
5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को बरकरार रखा, लेकिन सह-आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को राहत दे दी। तब जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा था कि खालिद और इमाम के खिलाफ UAPA के तहत प्रथम दृष्टया (prima-facie) मामला बनता है। बेंच ने यह भी कहा था कि “भागीदारी के स्तर” (hierarchy of participation) को देखते हुए सभी आरोपियों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता।New Delhi
