राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया आत्मसमर्पण, जानें पूरा मामला

Rajpal Yadav: Rajpal Yadav surrenders in Tihar Jail, learn the full story¹

Rajpal Yadav: अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस मामले में गुरुवार 5 फरवरी को यहां तिहाड़ जेल के अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इससे पहले, दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए दी गई समयसीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

तिहाड़ जेल के एक सूत्र ने कहा कि अभिनेता ने गुरुवार 5 फरवरी की शाम चार बजे जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अब जेल अधिकारी मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करेंगे। राजपाल यादव के वकील ने बताया था कि अभिनेता ने 50 लाख रुपये की राशि का इंतजाम कर लिया है और इसलिए भुगतान करने के लिए एक और सप्ताह का समय मांगा है। चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए गए राजपाल यादव को चार फरवरी तक जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया था।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनकी पृष्ठभूमि या उद्योग को आधार बनाकर “विशेष परिस्थितियां” पैदा करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। न्यायाधीश ने राजपाल यादव को तत्काल आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया और कहा कि चार फरवरी को अदालत के आदेश के बावजूद आत्मसमर्पण न करना दर्शाता है कि वे कानून के प्रति बेहद कम सम्मान रखते हैं। राजपाल यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से “दया की गुहार” लगाते हुए पिछले आदेश को वापस लेने का आग्रह किया, ताकि यादव शिकायतकर्ता एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की राशि चुकाने के लिए धन की व्यवस्था कर सकें।

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वकील ने दलील दी कि राजपाल यादव चार फरवरी को शाम चार बजे आत्मसमर्पण करने के निर्देश का पालन इसलिए नहीं कर सके, क्योंकि वे धन जुटाने की कोशिश कर रहे थे और शाम पांच बजे दिल्ली पहुंचे थे। अदालत ने कहा कि कानून का पालन करने वालों को पुरस्कृत किया जाता है उसकी अवहेलना करने वालों को नहीं। अदालत ने कहा कि अगर उसके पिछले आदेश को वापस लिया गया तो ये संदेश जाएगा कि अदालती आदेशों की बिना किसी परिणाम का सामना किए बार-बार अनदेखी की जा सकती है।

अदालत ने कहा, “यह अदालत किसी व्यक्ति की पृष्ठभूमि या उद्योग के आधार पर उसके लिए विशेष परिस्थितियां दिखाने या पैदा करने की अपेक्षा नहीं कर सकती। नरमी कभी-कभी आवश्यक हो सकती है, लेकिन जब लगातार आदेशों का पालन न किया जाए तो उन्हें अनंत काल तक नहीं बढ़ाया जा सकता।” अदालत ने कहा, “इन परिस्थितियों में, आत्मसमर्पण के आदेश को वापस लेने की याचिकाकर्ता के वकील की याचिका में कोई दम नहीं है। याचिकाकर्ता को आज ही तत्काल तिहाड़ जेल के अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया जाता है।” कार्यवाई के दौरान राजपाल यादव अदालत में मौजूद थे। वकील ने कहा कि यादव शिकायतकर्ता को 25 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट देने और एक भुगतान प्रक्रिया का पालन करने के लिए तैयार हैं।

अदालत राजपाल यादव और उनकी पत्नी की पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें चेक बाउंस मामलों में अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से उन्हें सुनाई गई सजा 2019 में बरकरार रखने के सत्र अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। जून 2024 में, उच्च न्यायालय ने उनकी सजा पर इस शर्त के साथ अस्थायी रोक लगा दी थी कि वह शिकायतकर्ता के साथ आपसी समझौते की संभावना तलाशने के लिए “ईमानदार और वास्तविक प्रयास” करेंगे। मजिस्ट्रेट अदालत ने यादव को छह महीने की सजा सुनाई थी। उस समय यादव के वकील ने कहा था कि ये लेनदेन फिल्म बनाने के लिए हुआ था, लेकिन फिल्म पर फ्लॉप हो गई, जिससे भारी वित्तीय नुकसान हुआ। दो फरवरी को पारित आदेश में राजपाल यादव को चार फरवरी शाम चार बजे तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था।

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इस आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा था कि यादव का आचरण निंदनीय है, क्योंकि उन्होंने शिकायतकर्ता एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की राशि चुकाने को लेकर अदालत के समक्ष दिए गए अपने आश्वासनों का निरंतर उल्लंघन किया। अदालत को बताया गया कि यादव के खिलाफ दर्ज सात मामलों में उन्हें प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान करना है। इसके बाद अदालत ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास पहले से जमा राशि को शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी करने का निर्देश दिया। अदालत ने आदेश में उल्लेख किया कि अक्टूबर 2025 में 75-75 लाख रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा किए गए थे और अब भी यादव को नौ करोड़ रुपये का भुगतान करना है। चार फरवरी को अदालत ने यादव को जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था।  Rajpal Yadav

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