Reliance Power – अनिल अंबानी की Company के खिलाफ विदेशी मुद्रा कानून के कथित उल्लंघन की जांच में कार्रवाई की गई है। ईडी के आदेश में सासन पावर में कंपनी की हिस्सेदारी और बैंक बैलेंस शामिल हैं। कंपनी ने आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी कदम उठाने की बात कही है।
News Desk : अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला। ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत जांच के दौरान कंपनी की भारत में मौजूद ₹2,032.81 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश 12 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया था। इसमें सासन पावर लिमिटेड में रिलायंस पावर की हिस्सेदारी, जिसकी कीमत करीब ₹2,026.65 करोड़ बताई गई है, और लगभग ₹6.16 करोड़ का बैंक बैलेंस शामिल है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है, जिसे कथित तौर पर फेमा के प्रावधानों का उल्लंघन कर भारत से बाहर रखा गया। इस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद 15 अक्टूबर को रिलायंस पावर के शेयर में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान शेयर ₹18.80 के निचले स्तर तक पहुंचा। हालांकि, शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव पूरे कारोबारी सत्र में बदल सकता है। यह कार्रवाई विदेशी निवेश और विदेश में धन के इस्तेमाल से जुड़े पुराने लेन-देन की जांच का हिस्सा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह फेमा के तहत संपत्तियों को जब्त करने का आदेश है; इसे अंतिम न्यायिक फैसला या कंपनी के दोषी साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।Reliance Power
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ईडी की जांच की शुरुआत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मिली जानकारी के बाद हुई। एजेंसी के अनुसार, रिलायंस पावर के खातों में करीब ₹2,101.46 करोड़ की रकम को बट्टे खाते में डालने या उससे जुड़े प्रावधान दर्ज किए गए थे। ये रकम ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और केमैन आइलैंड्स में स्थित कंपनियों को किए गए विदेशी निवेश और दिए गए अग्रिमों से जुड़ी थीं। जांच के तार 2006 तक जाते हैं, जब रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड के जरिए 300 मिलियन डॉलर जुटाए थे। बाद में यह कंपनी रिलायंस पावर में विलय हो गई। ईडी का आरोप है कि जुटाई गई रकम में से 275 मिलियन डॉलर सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी में लगाए गए और वहां से यह धन जिनेवा में डॉयचे बैंक के पास जमा कराया गया। एजेंसी के मुताबिक, इस जमा रकम का इस्तेमाल ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए कर्ज के लिए गारंटी के रूप में किया गया। ईडी का दावा है कि इन कंपनियों का संचालन भारत से किया जा रहा था और कर्ज की रकम का इस्तेमाल मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के जरिए धन को भारत वापस लाने तथा समूह के लाभ के लिए करने में हुआ। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि लेन-देन को वैध कारोबारी गतिविधि दिखाने के लिए कुछ दस्तावेज पिछली तारीखों में तैयार किए गए। ये सभी जांच एजेंसी के आरोप हैं और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है।Reliance Power
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रिलायंस पावर ने ईडी की कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए आरोपों को खारिज किया है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में कहा कि वह अपने हितों और शेयरधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह ले रही है और उचित कदम उठाएगी। कंपनी के अनुसार, जांच में शामिल लेन-देन कई साल पुराने हैं और संबंधित विदेशी निवेश के लिए आवश्यक मंजूरियां ली गई थीं। कंपनी ने यह भी कहा है कि सासन पावर में उसकी हिस्सेदारी पहले से ही पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) के पक्ष में गिरवी रखी गई है। इस घटनाक्रम में निवेशकों की नजर अब ईडी की कार्रवाई के आगे बढ़ने, कंपनी की कानूनी चुनौती और शेयर के प्रदर्शन पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों की तकनीकी राय के मुताबिक, शेयर के लिए ₹17.50 के आसपास अगला सपोर्ट और ₹21.50 का स्तर ऊपर की ओर महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि, तकनीकी स्तरों के आधार पर शेयर की भावी चाल की गारंटी नहीं दी जा सकती। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि नियामकीय कार्रवाई से जुड़ी खबरें शेयर की कीमत पर असर डाल सकती हैं, लेकिन किसी भी निवेश का फैसला कंपनी की वित्तीय स्थिति, आधिकारिक खुलासों और अपने जोखिम को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।Reliance Power
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