न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ टिप्पणी पर केस दर्ज, DGP ने दी जानकारी

Tamil Nadu: Case filed against Justice Swaminathan for his remarks, DGP informed

Tamil Nadu: तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि मदुरै की तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर ‘कार्तिगई दीपम्’ जलाने की अनुमति देने संबंधी आदेश के बाद मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जी. आर. स्वामीनाथन के विरुद्ध कथित रूप से जाति और धर्म के आधार पर मानहानिकारक टिप्पणियां करने वाले प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई की है और मामले दर्ज किए गए हैं।

शीर्ष अदालत में दायर एक शपथपत्र में डीजीपी जी. वेंकटरमण ने ये भी कहा कि सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों को पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि ऐसी कोई भी पुस्तक प्रकाशित या प्रसारित न होने दी जाए जिसमें अदालत/न्यायाधीश की छवि धूमिल करने वाले चित्रात्मक निरूपण, बयान, कार्टून या इसी प्रकार की सामग्री हो उन्होंने कहा, ‘‘विनम्रतापूर्वक ये बताया जाता है कि ग्रेटर चेन्नई पुलिस ने सोशल मीडिया मंचों-एक्स, फेसबुक, यूट्यूब, व्हॉट्सऐप और अन्य डिजिटल मंचों- पर मानहानिकारक, अपमानजनक और अदालत की गरिमा पर आघात करने वाले पोस्ट के व्यापक प्रसार से जुड़े याचिकाकर्ता के आरोपों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की है।’’

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डीजीपी ने अदालत से कहा, ‘‘ग्रेटर चेन्नई पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा के अंतर्गत साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने त्वरित कार्रवाई की और याचिका को उपयुक्त पंजीकरण संख्या आवंटित की। चूंकि याचिका में सोशल मीडिया पर उन पोस्ट और अकाउंट का विवरण नहीं दिया गया, जिन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने का आरोप है, इसलिए साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने ऐसे आपत्तिजनक पोस्ट/सामग्री की जांच कर सोशल मीडिया मंचों पर तुरंत कार्रवाई की और तदनुसार ‘एक्स’, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य मंचों पर नौ सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की।’’  Tamil Nadu 

ये अभ्यावेदन अधिवक्ता जी. एस. मणि की याचिका के जवाब में पेश किए गए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कम्युनिस्ट दलों समेत सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) समर्थित दलों और कुछ व्यक्तियों एवं वकीलों ने चेन्नई और मदुरै में मद्रास उच्च न्यायालय परिसर के भीतर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अवैध प्रदर्शन किए और न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ अत्यंत अवमाननापूर्ण टिप्पणियां कीं। उच्चतम न्यायालय ने 28 जनवरी को मणि की याचिका पर राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, चेन्नई पुलिस आयुक्त और अन्य को नोटिस जारी किए थे। उसने राज्य सरकार को मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था और मामले की सुनवाई के लिए दो फरवरी की तारीख तय की थी।

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इसमें आरोप लगाया गया है कि ‘‘जाति और धर्म पर आधारित मानहानिकारक टिप्पणियां’’ सामाजिक सद्भाव और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने और सांप्रदायिक अशांति को भड़काने के इरादे से की गई थीं। न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने एक दिसंबर, 2025 को उन रिट याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था जिनमें एक दरगाह के निकट तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित पत्थर के दीप स्तंभ ‘दीपथून’ पर कार्तिकई दीपम् को प्रज्वलित करने के लिए उचित व्यवस्था करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने तीन दिसंबर को एक और आदेश पारित किया जिसमें श्रद्धालुओं को स्वयं दीपक जलाने की अनुमति दी गई और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।

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