वेनेजुएला में हालात हर घंटे और खराब होते जा रहे हैं। 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले जबरदस्त भूकंप के तीन दिन बाद भी लोग गिरे हुए घरों और अपार्टमेंट की इमारतों के मलबे में अपनों को ढूंढ रहे हैं, जबकि उन्हें पता है कि जिदा बचे लोगों को खोजने का समय तेजी से निकल रहा है। भारत की ओर से भी वेनेजुएला में राहत व बचाव कार्य के लिए मदद के हाथ बढ़ाए गए हैं। यहां भारत का ऑपरेशन अमिस्ताद जारी है और मानवीय राहत सामग्री के साथ 41 सदस्यीय बचाव दल अपनी सेवाएं दे रहा है।
अधिकारियों ने शुक्रवार रात घोषणा की कि वे तबाही के केंद्र ‘ला ग्वायरा’ में लोगों के आने-जाने पर रोक लगाएंगे, क्योंकि अफरातफरी और ट्रैफिक की वजह से खोज अभियान में रुकावट आ रही थी। अधिकारियों ने कहा कि जो कोई भी वहां जाना चाहता है, उसे अब आधिकारिक परमिट लेना होगा, लेकिन उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी कि किसे जाने की अनुमति मिलेगी।
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बुधवार को आए भूकंप में मरने वालों की संख्या कम से कम 920 और लापता लोगों की संख्या 51,000 से ज्यादा हो गई है। सरकारी बचाव कर्मियों की कमी का हवाला देते हुए, वेनेजुएला के लोगों ने लापता अपनों को खोजने का काम खुद अपने हाथों में ले लिया। हालांकि अधिकारी सरकार की तरफ से मजबूत प्रतिक्रिया का दावा कर रहे थे, लेकिन लोगों का कहना था कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सरकारी बचाव दल बहुत कम दिखाई दिए।
गौरतलब है, इस तरह की आपदाओं में सहायता एजेंसियां लोगों को जिदा निकालने के लिए शुरुआती 48 से 72 घंटों को बहुत अहम मानती हैं, हालांकि अगर लोगों को खाना और पानी मिल जाए, तो यह समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।
