Delhi: नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आज ‘तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन 2026’ का भव्य समापन हुआ। तीन दिनों तक चले इस मंथन के समापन समारोह को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संबोधित किया और भारतीय भाषाओं को वैश्विक पटल पर और सशक्त बनाने का आह्वान किया। राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में इस दौरान उत्साह और गौरव का वातावरण रहा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वैश्विक हिन्दी परिवार और दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन ने दुनिया भर के भाषायी विद्वानों को एक मंच पर लाने का काम किया।Delhi:
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समापन सत्र के मुख्य अतिथि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और समृद्ध विरासत का आधार हैं।बिरला ने जोर दिया कि तकनीक के इस युग में भारतीय भाषाओं का वैश्विक प्रसार भारत के ‘सॉफ्ट पावर’ को और मजबूती देगा। ओम बिरला ने कहा कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि भारतीय भाषाएँ हमारी संस्कृति, संस्कार और सभ्यता की आत्मा हैं और इन्हीं के माध्यम से भारत की एकता एवं विविधता सशक्त होती है। बिरला ने कहा इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए विद्वानों, लेखकों और भाषा कार्यकर्ताओं के विचारों ने भारतीय भाषाओं के वैश्विक भविष्य को नई दिशा दी है।Delhi:
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बिरला ने कहा कि जब हम विश्व के किसी भी मंच पर जाएँ, तो अपनी मातृभाषा में बात करना हमें गर्व के साथ करना चाहिए। यदि हम स्वयं अपनी भाषाओं का सम्मान और प्रयोग नहीं करेंगे, तो उन्हें आगे बढ़ाने का दायित्व कौन निभाएगा।ओम बिरला ने कहा आज आवश्यकता है कि भारतीय भाषाओं को वैश्विक मंचों पर और अधिक प्रोत्साहित किया जाए, ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत विश्व मानवता से और गहराई से जुड़ सके।बिरला ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार की दिशा में एक सशक्त पहल है, जो सांस्कृतिक आत्मगौरव के साथ विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करता है।Delhi:
इस तीन दिवसीय महाकुंभ में यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे 70 से अधिक देशों के 100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।देश-विदेश से आए लेखकों, विद्वानों और भाषायी कार्यकर्ताओं ने भारतीय भाषाओं के समक्ष खड़ी समकालीन चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया। Delhi:
सम्मेलन का मुख्य केंद्र बिंदु भारतीय भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व शोध की भाषा के रूप में स्थापित करना रहा।ओम बिरला ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं के लिए एक नया द्वार खोलेगा। ना केवल हिंदी, बल्कि अपनी सभी क्षेत्रीय भाषाओं को वैश्विक पहचान दिलाने के संकल्प को पूरा करेगा।यह तीन दिवसीय सम्मेलन न केवल एक शैक्षणिक मंच साबित हुआ, बल्कि इसने सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को भी जीवंत किया है। Delhi:
