मथुरा में होली उत्सव की धूम, लट्ठमार होली देखने के लिए देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु

Mathura

उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म नगरी मथुरा के नंदगांव में हुरियारे अपनी ढाल सजा रहे हैं। यहां लट्ठमार होली देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, क्योंकि भक्तिमय माहौल के बीच यहां की होली विश्व प्रसिद्ध है।

“कौन गाँव के कुंवर कन्हैया, कौन गाँव के कुंवर कन्हैया,
कौन गावं राधा गोरी है रे रसिया,
आज बृज में होली है रे रसिया।।”

यह गीत नहीं भावना है… भावना है उस मन की जो राधा कृष्ण की मनमोहक होली के रंग में खुद को सराबोर करने के लिए बृज क्षेत्र में खास तौर से नंदगांव और बरसाना आया है। ये गाना राधा कृष्ण की भक्ति के रंग में हर किसी को डुबो रहा है।

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हुरियारे अपने सिर पर पगड़ी कसकर बांधे हुए हैं और हाथ में ढाल पकड़े हुए हैं ताकि जब बरसाने की हुरियारिन इन पर लट्ठ बरसाए तो वे इसका सामना बखूबी कर सकें। बरसाना और नंदगांव में ये परंपरा बरसों से चली आ रही है और ये परंपरा होली के त्योहार को और भक्तिमय बना देती है।

यह अनूठी परंपरा राधा और भगवान कृष्ण के प्रेम प्रसंग को पुनर्जीवित करती है, क्योंकि माना जाता है कि कन्हैया और उनके मित्र नंदगांव से होली खेलने बरसाना आते थे, तो राधारानी और उनकी सहेलियां उन्हें लट्ठ मारकर भगाती थीं, ताकि वो रंग ना डाल सकें। यहां बरसाने की गोपियों के हर चंचल प्रहार को नंदगांव के ग्वाले प्रसाद मानते हैं। क्योंकि ये अपने प्रिय कान्हा के प्रति राधा के दिव्य प्रेम की अभिव्यक्ति है।

सदियों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए हर साल यहां देश विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं और राधा कृष्ण के दौर की यादों में खो जाते हैं। होली का त्योहार चार मार्च को पूरे देश में मनाया जाएगा, लेकिन बृज क्षेत्र में ये उत्सव 40 दिन तक मनाया जाता है।

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