Delhi: पुर्तगाल के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सभा के माननीय उपसभापति हरिवंश से भेंट की

Delhi: भारत और पुर्तगाल के बीच संबंध गहरी मित्रता, पारस्परिक सम्मान, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों तथा ऐतिहासिक और समुद्री संपर्क माध्यमों के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं प्रवासी समुदाय के संबंधों पर आधारित हैं। पुर्तगाल की संसद के वाईस प्रेसीडेंट महामहिम मार्कोस पेरेस्त्रेलो दे वासकोंसेलोस के नेतृत्व में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आज संसद भवन में राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश से शिष्टाचार भेंट की।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित करते हुए, हरिवंश ने कहा कि भारत और पुर्तगाल के बीच संबंध गहरी मित्रता, पारस्परिक सम्मान, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, ऐतिहासिक एवं समुद्री संपर्क माध्यमों और सांस्कृतिक एवं प्रवासी समुदाय के संबंधों पर आधारित हैं। उन्होंने स्मरण कराया कि भारत और पुर्तगाल के बीच राजनयिक संबंधों के पुनर्स्थापन  की 50वीं वर्षगांठ वर्ष 2025 में मनाई गई, जिससे यह वर्ष दोनों देशों के लिए अत्यंत विशेष बन गया।उपसभापति हरिवंश ने यूरोपीय संघ के साथ भारत की सहभागिता को प्रोत्साहित करने में पुर्तगाल द्वारा निभाई गई महत्त्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
उपसभापति ने उल्लेख किया कि वर्ष 2000 में पहला भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन आयोजित करने के साथ-साथ वर्ष 2021 में पोर्टो में फर्स्ट इंडिया–ईयू + 27 लीडर्स का शिखर सम्मेलन भी पुर्तगाल द्वारा आयोजित किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि अत्यंत सफल रहे 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष की हैसियत में पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री एंतोनियो कोस्टा ने यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष और हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ की थी। इस शिखर सम्मेलन से कई महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त हुए, जिनमें भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से संबंधित वार्ताओं के निष्कर्ष तक पहुंचना भी शामिल है।दोनों देशों के बीच राजनीतिक सहयोग को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने कहा कि नियमित उच्च-स्तरीय संपर्कों और वैचारिक आदान-प्रदान ने द्विपक्षीय संबंधों को दिशा दी है और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2024 में रियो डी जेनेरियो में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री मोंटेनेग्रो के बीच हुई पहली बैठक में दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों की समीक्षा की गई और विशेष रूप से आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर बल दिया गया।
उपसभापति हरिवंश ने कहा कि दो सशक्त लोकतंत्रों के रूप में भारत और पुर्तगाल के बीच संसदीय वैचारिक आदान-प्रदान की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विशेष रूप से संसद के युवा सदस्यों, जो दोनों देशों के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, के बीच संसदीय वैचारिक आदान-प्रदान को और बढ़ावा दिया जाना चाहिए I
द्विपक्षीय व्यापार में हुई वृद्धि की सराहना करते हुए, हरिवंश ने कहा कि इस दिशा में भारत और पुर्तगाल के बीच सकारात्मक प्रवृत्ति देखने को मिली है। उन्होंने उल्लेख किया कि हरित एवं नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा रक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग निरंतर संवर्धित हुआ है, साथ ही वस्त्र, कॉर्क, कृषि उत्पादों और मशीनरी जैसे पारंपरिक व्यापार में भी सहयोग बना हुआ है। उन्होंने आगे यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच रियल स्टेट, होटल एवं आतिथ्य सत्कार , सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार तथा औषधि उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय द्विपक्षीय निवेश मौजूद है।
उपसभापति हरिवंश ने यह कहते हुए संतोष व्यक्त किया कि पुर्तगाल में भारतीय संस्कृति और दर्शन, योग और आयुर्वेद, संगीत, नृत्य, भारतीय व्यंजन तथा भारतीय फिल्मों के प्रति रुचि निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पुर्तगाल में निवासरत विशाल, सतत कार्यशील और बहुआयामी भारतीय प्रवासी समुदाय भारत और पुर्तगाल के बीच ऐतिहासिक और स्थायी सांस्कृतिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इनमें सबसे प्रसिद्ध व्यक्तियों में पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री श्री एंतोनियो कोस्टा शामिल हैं, जो भारत के प्रवासी नागरिक (ओवरसीज़ सिटिजन ऑफ इंडिया) हैं।
उपसभापति ने कहा कि भारत के साथ अपने सांस्कृतिक और पैतृक संबंधों के कारण इंडो–पुर्तगाली समुदाय दोनों देशों को जोड़ने वाले एक सेतु के रूप में कार्य करता है और द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि साझा सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुराने ऐतिहासिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए भारत और पुर्तगाल को सांस्कृतिक क्षेत्र में सहयोग को निरंतर बढ़ावा देना चाहिए।बैठक का समापन करते हुए उपसभापति ने भारत और पुर्तगाल के बीच स्वाभाविक सामंजस्य और परस्पर पूरकताओं के अस्तित्व की पुनः पुष्टि की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और पुर्तगाल को अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करने, नए अवसरों का अन्वेषण करने तथा भविष्योन्मुखी साझेदारी की पूर्ण संभावनाओं को साकार करने के लिए अपने प्रयास जारी रखने चाहिए।

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