Delhi: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने TV Rating Policy 2026 को नोटिफाई कर दिया है। सालों पुराने नियमों को बदलकर अब सरकार ने ‘TV रेटिंग पॉलिसी 2026 जारी की है इसमे पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा पर जोर दिया गया है। टेलीविजन की दुनिया में कौन सा चैनल नंबर 1 है, इसका फैसला अब और भी पारदर्शी होगा।
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केंद्र सरकार ने 2014 के पुराने नियमों को खत्म कर TV Rating Policy 2026 लागू कर दी है।मुख्य बदलाव के तहत लैंडिंग पेज का खेल खत्म हो गया है।इस नई पॉलिसी का सबसे बड़ा प्रहार ‘लैंडिंग पेज’ पर हुआ है। अक्सर चैनल अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए लैंडिंग पेज का सहारा लेते थे, लेकिन अब इसे रेटिंग में नहीं गिना जाएगा। इसका इस्तेमाल केवल एक मार्केटिंग टूल की तरह होगा।वही छोटे प्लेयर्स की एंट्री आसान करने के लिए सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देते हुए रेटिंग एजेंसी खोलने के लिए नेट वर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 5 करोड़ रुपये कर दिया है।
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इससे बाजार में नई कंपनियों के आने का रास्ता साफ होगा।इसी के साथ बड़ा सैंपल साइज, सटीक नतीजे देगा।अभी तक कम सैंपल साइज की वजह से रेटिंग पर सवाल उठते थे। अब एजेंसियों को 18 महीने के भीतर अपनी पहुंच 80,000 घरों तक और अंततः 1,20,000 घरों तक बढ़ानी होगी। इसमें केबल, DTH के साथ-साथ OTT और कनेक्टेड TV का डेटा भी शामिल होगा।नई पॉलिसी में सख्त ऑडिट और प्राइवेसी डेटा के साथ छेड़छाड़ रोकने के लिए ‘डुअल-ऑडिट सिस्टम’ अनिवार्य किया गया है।
साथ ही, दर्शकों की प्राइवेसी के लिए Digital Personal Data Protection (DPDP) Act का सख्ती से पालन करना होगा।साफ है कि सरकार अब रेटिंग के नाम पर होने वाले किसी भी हेरफेर को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अगर कोई एजेंसी नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द भी किया जा सकता है। यह कदम न केवल ब्रॉडकास्टर्स बल्कि विज्ञापनदाताओं और आम दर्शकों के लिए भी एक भरोसेमंद माहौल तैयार करेगा।
