Uttar Pradesh: इस साल मॉनसून केरल में थोड़ा जल्दी, लगभग 26 मई तक पहुँच सकता है, लेकिन मध्य और उत्तरी भारत में अभी बारिश दूर ही लग रही है। इस झुलसा देने वाली गर्मी से निपटने के लिए लोग अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं — ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, ठंडी छाँव और हल्के कपड़े।Uttar Pradesh
लेकिन गर्मी का असर सिर्फ़ इंसानों पर ही नहीं पड़ रहा है। आमों को भी सुरक्षा की ज़रूरत है। प्रयागराज के विशेषज्ञ ‘फलों की बैगिंग’ (fruit bagging) की सलाह दे रहे हैं। यह एक ऐसा तरीका है जिसमें आमों को ढक दिया जाता है ताकि उन्हें झुलसा देने वाली लू से बचाया जा सके, क्योंकि पूरे इलाके में तापमान लगातार बढ़ रहा है।
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छोटे पौधों के लिए भी सुरक्षा के उपाय ज़रूरी हैं, जहाँ नमी बनाए रखना बहुत अहम हो जाता है। किचन गार्डन और छतों पर लगे पौधों के लिए, शेड नेट (छाँव देने वाले जाल) तेज़ गर्मी से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। ज़्यादा तापमान की वजह से अक्सर फल समय से पहले पक जाते हैं या फिर पेड़ से समय से पहले ही गिर जाते हैं। हालाँकि, कुछ आसान उपायों से फलों को ठंडा और सेहतमंद रखा जा सकता है। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ के मुताबिक, अल नीनो — यानी प्रशांत महासागर का असामान्य रूप से गर्म होना — इस साल एक ‘सुपर’ अल नीनो हो सकता है।Uttar Pradesh
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यह ‘सुपर अल नीनो’ भारत में तापमान को काफ़ी हद तक बढ़ा सकता है और मॉनसून को कमज़ोर कर सकता है। सभी फलों में, भारत में आमों का एक शाही दर्जा है। देश के कई हिस्सों में लू की स्थिति को देखते हुए, ‘फलों के राजा’ को खास सुरक्षा की ज़रूरत है — सुरक्षा वाले बैग से लेकर ठंडे पानी से धोने तक — ताकि वे रसीले और स्वादिष्ट बने रहें।Uttar Pradesh
