GUJARAT: सूरत के ओलपाड तालुका के सरस गांव में फैली यह केले की खूबसूरत खेती किसान कल्पेश पटेल की प्राकृतिक खेती की नई पहचान बन चुकी है। पिता की बीमारी के बाद उन्होंने रासायनिक खेती का रास्ता छोड़ वर्ष 2019 से प्राकृतिक खेती अपनाई। आज वे अपनी जमीन पर 50 से अधिक किस्मों के केले की खेती कर रहे हैं और उनके मॉडल को देखने देशभर से किसान यहां पहुंच रहे हैं।GUJARAT
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कल्पेश पटेल जैविक और वन आधारित खेती पद्धति का उपयोग करते हैं। साल 2025 में उनके खेत में तैयार केले के एक गुच्छे का वज़न 73 किलो तक पहुंचा। जहां देश में केले के एक गुच्छे का औसत वजन करीब 20 किलो माना जाता है, वहीं उनके खेत में इसका औसत वजन 30 किलो से अधिक रहता है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग बंद करने से उनकी लागत घटी है और अब वे हर साल 10 से 12 लाख रुपये की आय अर्जित करते हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार प्राकृतिक खेती को लगातार बढ़ावा दे रही है। कृषि विभाग किसानों को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है, जिससे कई किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं। कल्पेश पटेल की सफलता आज गुजरात में प्राकृतिक खेती के प्रति बढ़ती जागरूकता और आत्मनिर्भर किसान मॉडल का उदाहरण बन चुकी है।GUJARAT
