CBSE आंसर शीट स्कैनिंग और अंकों के गलत मूल्यांकन को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर से मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने CBSE आंसर शीट स्कैनिंग और अंकों के गलत मूल्यांकन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

आपको बता दें, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने CBSE में आंसर शीट को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर से स्कैन करने के टेंडर को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है। इसको लेकर उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ पर किए पोस्ट में कहा कि, “CBSE के मई 2025 के टेंडर में यह शर्त थी कि आंसर शीट को ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर से स्कैन किया जाएगा, उनकी बाइंडिंग (स्पाइन) सुरक्षित रहेगी, और कम से कम 300 DPI रेज़ोल्यूशन पर स्कैन किया जाएगा।

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अगस्त में दोबारा जारी किए गए टेंडर से चुपचाप ये सारी शर्तें हटा दी गईं। “स्कैनर” शब्द को सामान्य बना दिया गया। रेज़ोल्यूशन घटाकर 200 DPI कर दिया गया। अब हमें पता चल गया है कि असल में इसका क्या मतलब था। यह खुलासा हुआ है कि COEMPT ने आंसर शीट को मोबाइल फ़ोन से स्कैन किया था।

धुंधली कॉपियाँ, गायब पेज, स्कैन न की गई किताबें—ये कोई “गलतियाँ” नहीं हैं। ये उस कॉन्ट्रैक्ट का पहले से तय नतीजा हैं, जिसे किसी खास वेंडर को फ़ायदा पहुँचाने के लिए तैयार किया गया था। यह एक धोखा है। और हर वह बच्चा, जिसके अंकों का गलत मूल्यांकन हुआ है, इस धोखे का शिकार है।

आज सुबह, प्रधानमंत्री के पास आमों के बारे में बात करने का समय था। लेकिन उनके पास उन 18.5 लाख बच्चों के बारे में बात करने का समय नहीं था, जिनकी आंसर शीट मोबाइल फ़ोन से स्कैन की गई थीं। धर्मेंद्र प्रधान जी अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं। मोदी जी की चुप्पी अब सिर्फ़ उदासीनता नहीं रही। यह इस अपराध में उनकी मिलीभगत का सबूत है।”

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इसके अलावा उन्होंने कहा कि, “जेबकतरों से सावधान – आज वो CBSE के अंदर बैठे हैं। CBSE की गलती से नंबर ग़लत आए तो आपको क्या मिलता है?
एक bill:
Digital scan copy: 100 रुपये/विषय
Re-totalling: 100 रुपये/ पेपर
Re-evaluation: 25 रुपये/सवाल

अपनी ही आंसर सीट की सही जाँच के लिए एक बच्चे को 2000 रुपये तक भरने पड़ सकते हैं। सोचिए, जब 4 लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन डालें हैं तो CBSE कितनी कमाई कर रहा है। जब स्कैनिंग फ़ोन से हुई हो, ग़लत मार्किंग तय है। और उसे ठीक करवाने की क़ीमत बच्चा भर रहा है।

गलती CBSE की। सज़ा बच्चे की। कमाई सरकार की। जब शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बना दिया जाए तब गलती सुधारी नहीं जाती। बढ़ाई जाती है। और इसकी सबसे बड़ी क़ीमत हमारे बच्चे चुका रहे हैं – अपने समय से, अपने आत्मविश्वास से, और अपने भविष्य से।”

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