Delhi: विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जम्मू-कश्मीर, नेपाल और बांग्लादेश पर दिया बड़ा बयान

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Delhi: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं।जम्मू-कश्मीर का जिक्र करने वाले ईयू-पाकिस्तान संयुक्त प्रेस बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर इस तरह की टिप्पणियां पूरी तरह से अनावश्यक हैं। ​रणधीर जायसवाल ने कहा कि “जम्मू-कश्मीर से जुड़े संदर्भ पर हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि भारत के आंतरिक मामलों पर की गई ऐसी अनावश्यक टिप्पणियों को हम सिरे से खारिज करते हैं।”Delhi:

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​विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बार फिर दुनिया को याद दिलाया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। भारत ने साफ लफ्जों में कहा है कि जिनका इस विषय में कोई अधिकार या भूमिका नहीं है, उन्हें इस पर टिप्पणी करने से पूरी तरह बचना चाहिए। भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा।वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल सीमा विवाद पर स्थिति करते हुए बयान दिया है।नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा भारत-नेपाल सीमा को लेकर की गई टिप्पणी पर भी विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है।

रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों देशों के बीच सीमा का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा पहले ही निर्धारित किया जा चुका है।​विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जो कुछ हिस्सों में मुद्दे लंबित हैं, वे मुख्य रूप से गंडक नदी के प्रवाह में बदलाव के कारण उत्पन्न हुए हैं। इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में सीमा पार अतिक्रमण और ‘नो-मैन्स लैंड’ पर कब्जे के मामलों को लेकर दोनों देश मिलकर संयुक्त मैपिंग कर रहे हैं।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ​रणधीर जायसवाल ने कहा कि “भारत और नेपाल के बीच के सभी सीमा संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए पहले से ही द्विपक्षीय तंत्र मौजूद हैं। ये मामले केवल दोनों देशों के बीच ही सुलझाए जाएंगे और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।”इसके साथ ही, भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों देशों ने जल बंटवारे पर अपने सहयोग को और अधिक स्ट्रक्चर्ड (व्यवस्थित) बनाया है। ऐतिहासिक ‘गंगा जल संधि’ के रिन्यूअल मैकेनिज्म (नवीनीकरण प्रक्रिया) को लेकर दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं, ताकि इस दिशा में सहयोग को और मजबूत किया जा सके।विदेश मंत्रालय के इन बयानों से साफ है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय मुद्दों को बातचीत से सुलझाने का पक्षधर है, लेकिन देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में किसी भी बाहरी दखलंदाजी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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