UTTAR PRADESH: दूर-दूर तक फैली गंगा नदी दुनिया के सबसे प्राचीन माने जाने वाले शहर वाराणसी की पहचान रही है।चिलचिलाती गर्मी की वजह से नदी का जलस्तर घटा है और इसके बीचो-बीच रेत के टीले नजर आ रहे हैं। बीच धारा में भी रेत दिखाई दे रही है तो किनारों पर फैली रेत की बड़ी-बड़ी परतें मौसम की मार का असर लगती हैं।UTTAR PRADESH
Read Also-PUNJAB: जालंधर में हत्या के प्रयास के मामले में वांछित व्यक्ति पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया
हालांकि पर्यावरणविदों का मानना है कि रेत के ये ढेर असल में सामने दिख रहे एक संकट का संकेत हो सकते हैं। वे इस प्राचीन नदी के घटते जलस्तर के लिए पनबिजली परियोजनाओं और सिंचाई के लिए बनी लिफ्ट नहरों को जिम्मेदार मानते हैं। इतना ही नहीं, जानकारों का मानना है कि गर्मियों में तेज धूप से नदी के पानी का तापमान बढ़ जाता है, जिससे जलीय जीवन पर बुरा असर पड़ता है। उनके मुताबिक नदी की प्रदूषकों को कम करने की क्षमता घटने से स्थिति और भी खराब हो जाती है।UTTAR PRADESH
Read Also-Healthcare: ‘विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस’ से पहले विशेषज्ञों ने साफ-सफाई की बताई अहमियत
गंगा नदी लाखों लोगों का सहारा है। इसे साफ रखने और इसके बहाव को बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ लंबे समय तक चलने वाले समाधानों का सुझाव देते हैं। इनमें बारिश के पानी को इकट्ठा करना और भूजल स्तर को बेहत बनाने जैसे उपाय शामिल हैं। वाराणसी जैसे मंदिर शहर में गंगा नदी में दिख रहे रेत के टीले अब एक चुनौती बन गए हैं। ऐसे में सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी इस नदी को लगातार बहते रहने देने के लिए सिर्फ सामूहिक प्रयास ही मददगार साबित होंगे।UTTAR PRADESH
