विदेशी निवेशकों ने जून में बिकवाली जारी रखी और कुल 49,340 करोड़ रुपये घरेलू शेयर बाजार बाजार से निकाले। मुख्य रूप से वैश्विक जोखिम से बचने, विकसित बाजारों को प्राथमिकता और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी तथा घरेलू बाजार में अधिक मूल्यांकन की वजह से बिकवाली की गयी। वहीं शेयर बाजार में आज सेंसेक्स 579 अंक उछलकर 77,502 पर और निफ्टी 169 अंक बढ़कर 24,175 पर बंद हुए हैं।
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लि. के आंकड़ों के अनुसार, इस ताजा निकासी के साथ, 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) भारतीय इक्विटी बाजार से कुल 2.7 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके है। यह पूरे वर्ष 2025 में निकाली गई 1.66 लाख करोड़ रुपये की राशि से कहीं अधिक है।
Read Also: भारत और जापान ने अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की
आंकड़ों से पता चलता है कि एफपीआई फरवरी को छोड़कर 2026 के हर महीने में शुद्ध बिकवाल बने रहे। उन्होंने जनवरी में 35,962 करोड़ रुपये निकाले, जबकि फरवरी में शुद्ध लिवाल बनकर 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो 17 महीनों में सबसे अधिक मासिक प्रवाह था। हालांकि, मार्च में यह प्रवृत्ति तेजी से बदली और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये निकाले। अप्रैल में शुद्ध रूप से 60,847 करोड़ रुपये और मई में 32,963 करोड़ रुपये की निकासी के साथ बिकवाली का दबाव जारी रहा। एफपीआई ने जून 49,340 करोड़ रुपये निकाले।
नतीजतन, महीने के आखिर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली की रफ्तार धीमी पड़ गई, हालांकि यह पहले हुई बड़ी निकासी की भरपाई के लिए काफी नहीं थी। चालू खाता घाटे को पूरा करने और भुगतान संतुलन को सहारा देने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के महत्व को देखते हुए, नीति-निर्माताओं ने जून में विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए कई उपाय घोषित किए।
Read Also: TAMIL NADU: कुंबाकोणम में ट्रांसफॉर्मर ठीक करते समय बिजली बोर्ड के कर्मचारी की करंट लगने से हुई मौत
इनमें व्यावसायिक बैंकों द्वारा जुटाए गए एफसीएनआर जमा पर हेजिंग लागत को आरबीआई द्वारा उठाना, फॉरेक्स स्वैप विंडो का विस्तार करना, फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के जरिए सरकारी बॉन्ड तक पहुंच बढ़ाना और घरेलू इक्विटी में अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारत के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) के लिए निवेश सीमा बढ़ाना शामिल है।
