Delhi: कोयला ब्लॉक घोटाला मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट, 11 साल बाद मिला न्याय

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Delhi: उच्चतम न्यायालय ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ जारी आपराधिक मामला बुधवार को बंद कर दिया और उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने वाले आदेश रद्द कर दिए। पूर्व प्रधानमंत्री का 27 दिसंबर 2024 को निधन हो गया था और अब इस हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामले में औपचारिक रूप से बरी हो गए हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने पूर्व प्रधानमंत्री सिंह और अन्य को क्लीन चिट दिए जाने संबंधी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार कर ली।Delhi:

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शीर्ष अदालत ने कहा कि अधीनस्थ अदालत के न्यायाधीश के पास सीबीआई की ‘क्लोजर रिपोर्ट’ को खारिज कर संज्ञान लेने का कोई कारण नहीं था। पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के कारण यह अपील निष्फल मानकर समाप्त की जा सकती थी लेकिन विशेष न्यायाधीश द्वारा संज्ञान लेने और अपीलकर्ता को तलब करने के पहलू पर विचार करने के लिए हमने सीबीआई द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्ट का अध्ययन किया।’’Delhi:

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अदालत ने कहा, ‘‘जांच एजेंसी की रिपोर्ट स्वीकार करने के संबंध में इस अदालत द्वारा लगातार तय किए गए मानकों को ध्यान में रखते हुए हम संतुष्ट हैं कि माननीय न्यायाधीश के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर संज्ञान लेने का कोई कारण नहीं था। हम अपील स्वीकार करते हैं और विवादित आदेश को रद्द करते हैं। परिणामस्वरूप, हम सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को बंद करते हैं।’’वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित कथित कोयला घोटाले में एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी. सी. पारेख और तीन अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था। हालांकि, न्यायालय ने इस आदेश में हस्तक्षेप करते हुए इस पर रोक लगा दी थी।’Delhi:

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश भारत पराशर ने छह आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और धारा 409 (लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा आपराधिक विश्वासघास) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए आरोपी के रूप में तलब किया था।इन तीनों के अलावा, अदालत ने इस मामले में मेसर्स हिंडाल्को, उसके अधिकारियों शुभेंदु अमिताभ और डी. भट्टाचार्य को भी आरोपी के रूप में तलब किया था। ये मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक, मेसर्स हिंडाल्को के आवंटन से संबंधित है।उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पास ही कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार था। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वो तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के कुछ तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ करे। इनमें उस समय के प्रधान सचिव टी. के. ए. नायर और तत्कालीन निजी सचिव बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम भी शामिल थे।’Delhi:

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