Ahmedabad: सुप्रीम कोर्ट ने एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की जनहित याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दे दी है। ये याचिका बीते साल 12 जून को हुए एअर इंडिया विमान हादसे की जांच को लेकर दाखिल की गई है। एनजीओ का कहना है कि याचिका में आधिकारिक जांच में नागरिकों के जीवन, समानता और सत्य जानकारी प्राप्त करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है।
लंदन के गैटविक हवाई अड्डे जा रही एअर इंडिया की बोइंग 787-8 फ्लाइट AI171 का संचालन पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल और को-पायलट कैप्टन क्लाइव कुंदर कर रहे थे। अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद यह हादसा हुआ, जिसमें 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों सहित 260 लोगों की मौत हो गई। बुधवार 28 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ ‘सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन’ की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि अब तक न तो केंद्र सरकार और न ही विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) ने याचिका पर अपना जवाब दाखिल किया है। Ahmedabad
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भूषण ने कहा कि “सभी पायलट संघ का कहना है कि बोइंग 787 विमान में खराबी है और इसे उड़ान भरने से रोकना होगा,” “चुनावी सूची में विशेष गहन संशोधन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई आज समाप्त हो जाएगी और हम आपको जल्द ही अगली तारीख देंगे।” पिछले साल 13 नवंबर को, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि एअर इंडिया के दिवंगत पायलट कैप्टन सभरवाल को एएआईबी की दुर्घटना संबंधी प्रारंभिक रिपोर्ट में दोषी नहीं ठहराया गया था न्यायालय ने कैप्टन सभरवाल के पिता पुष्कराज सभरवाल की याचिका पर केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशक (डीजीसीए) को नोटिस भी जारी किया था। Ahmedabad
पुष्कराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने एयर इंडिया विमान दुर्घटना की अदालत की निगरानी में पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
