Delhi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने उत्तराखंड सरकार और केंद्र सरकार पर एक बड़ा हमला बोला है।कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को दरकिनार कर 1320 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट का ठेका एक निजी उद्योगपति (अडानी समूह) को देने के लिए नियमों को मनमाने ढंग से बदला गया।Delhi:
PSU प्रोजेक्ट को रद्द करने का आरोप:
पवन खेड़ा ने बताया कि जुलाई 2024 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) के माध्यम से 1320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए केंद्र सरकार से कोयले की मांग की थी, जिसकी मंजूरी भी मिल गई थी हालांकि, इसके मात्र छह महीने बाद (जनवरी 2025) PSU प्रोजेक्ट को अचानक यह कहकर रद्द कर दिया गया कि वे इसे समय पर पूरा नहीं कर पाएंगे Delhi:
टेंडर की शर्तों में फेरबदल:
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) द्वारा टेंडर जारी किए जाने के बाद टेंडर की 86 में से 84 शर्तों को बदल दिया गया। इनमें यह शर्त भी जोड़ी गई कि पूरा 1320 मेगावाट का पावर प्लांट देश के किसी भी कोने में हो सकता है, जिससे छत्तीसगढ़ स्थित अमरकंटक (लैंको) प्लांट के जरिए इसे पूरा किया जा सके।
जनता पर आर्थिक बोझ:
कांग्रेस का दावा है कि ट्रांसमिशन कॉस्ट (बिजली आपूर्ति का खर्च) और फिक्स्ड चार्ज सीलिंग (70% से बढ़ाकर 75%) में बदलाव के कारण, अगले 25 वर्षों तक बिजली ली जाए या न ली जाए, उत्तराखंड की जनता को भारी वित्तीय भुगतान करना पड़ेगा Delhi:
सरकार से कांग्रेस के मुख्य सवाल:
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार से कई सवाल पूछे हैं-
आखिर UJVNL और THDC जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का संयुक्त प्रोजेक्ट क्यों रद्द किया गया?
एक विशिष्ट निजी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की 84 शर्तों में बदलाव क्यों किया गया?Delhi:
उत्तराखंड से 1000 किलोमीटर दूर स्थित प्लांट से बिजली खरीदने और उसका अतिरिक्त बोझ जनता पर डालने की अनुमति क्यों दी गई?साथ ही पवन खेड़ा ने डिजिटल भुगतानों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क और कराधान को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना की और इसे आम जनता तथा व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बताया वही हाल ही में अमेरिकी नीतियों, व्यापारिक टेरिफ और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत के रुख पर बोलते हुए पवन खेड़ा ने सरकार की विदेश नीति के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि वह इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और सड़क से लेकर संसद तक इसका विरोध करेगी।
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