Delhi-जंतर-मंतर प्रदर्शन केस: ‘कोर्ट को मछली बाजार बना रखा है’, वकीलों पर भड़के CJI सूर्यकांत

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Delhi-सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी एक संगठन को प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं है। अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार के साथ कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका के अधिकार को भी महत्वपूर्ण बताया।

News Desk : दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन स्थलों के इस्तेमाल को लेकर अहम टिप्पणी की। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि कोई भी संगठन किसी एक प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं कर सकता। दूसरे संगठनों, किसानों, मजदूरों और ट्रेड यूनियनों को भी अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करने का अवसर मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान वकीलों के लगातार बोलने पर सीजेआई ने नाराजगी जताते हुए कहा, “आप लोगों ने कोर्ट को मछली बाजार बना रखा है।” उन्होंने अदालत में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की बात भी कही।

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अदालत ने कहा कि संविधान प्रदर्शन करने का अधिकार देता है, लेकिन कारोबार और आजीविका का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। सीजेआई ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन के कारण रोज कमाने वाले मजदूर अपनी रोजी-रोटी कैसे चलाएंगे। व्यापारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि प्रदर्शनों के कारण कारोबार को करीब 2,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि कारोबार में गिरावट के लिए केवल प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है, जबकि सरकारी प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग का भी असर हो सकता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि कई बार प्रदर्शनकारियों ने दुकानों को बंद कराया और बिना अनुमति मार्च निकाला।

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केंद्र की ओर से तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जुलाई में हुए प्रदर्शन के लिए एक दिन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी 17 दिनों तक वहां मौजूद रहे। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने रामलीला मैदान को अधिसूचित प्रदर्शन स्थल बताते हुए सवाल उठाया कि लोग अपनी मांगें रखने के लिए आखिर कहां जाएं। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान निगरानी और निजता के अधिकार का मुद्दा उठाया। इस पर केंद्र ने बताया कि सीसीटीवी से निगरानी की जा रही थी। अदालत ने सार्वजनिक स्थान पर निजता की अपेक्षा की सीमा पर भी विचार करने की बात कही।

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