France Student Protest: फ्रांस में छात्रों का आंदोलन खराब स्कूलों, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह पुलिस से हिंसक टकराव, आगजनी और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों तक पहुंच गया।
News Desk : फ्रांस में छात्रों का प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन बन चुका है। इसकी शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के उपनगर Créteil के Saint-Exupéry हाई स्कूल से हुई थी। छात्र, शिक्षक और अभिभावक स्कूल में कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों की शिकायत थी कि कई स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, कक्षाएं जरूरत से ज्यादा भरी हैं और कई इमारतें जर्जर हालत में हैं। कुछ जगहों पर शिक्षक के अनुपस्थित होने पर उनकी जगह दूसरा शिक्षक तक उपलब्ध नहीं होता। शुरुआत में यह आंदोलन स्थानीय था, लेकिन सोशल मीडिया और दूसरे स्कूलों के समर्थन से तेजी से पूरे फ्रांस में फैल गया।France
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इसके बाद छात्रों ने स्कूलों के गेट बंद करने, बैरिकेड लगाने और कक्षाओं के बहिष्कार का रास्ता अपनाया। आंदोलन लिले से मार्सिले और नांत से ल्यों तक पहुंच गया। कई जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर कूड़ेदानों और दूसरी चीजों में आग लगाई गई, पुलिस पर सामान फेंका गया और स्कूलों में तोड़फोड़ हुई। 6 अक्टूबर तक फ्रांस में 5,060 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 87 प्रतिशत नाबालिग हैं। 1,800 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई चल रही है। वहीं कम से कम 215 छात्र और 715 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 5 अक्टूबर को Lens शहर में 15 साल के एक छात्र का हाथ पुलिस की इस्तेमाल की गई ग्रेनेड से बुरी तरह घायल होकर अलग हो गया। इस घटना ने पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस और तेज कर दी है।France
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अब यह आंदोलन सिर्फ स्कूलों की समस्या तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों की मांगों में ज्यादा शिक्षक, बेहतर स्कूल भवन, कम भीड़ वाली कक्षाएं, बेहतर संसाधन और शिक्षा व्यवस्था में असमानता कम करना शामिल है। कई छात्र विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया Parcoursup को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। सरकार ने कुछ मांगों को जायज माना है और स्कूलों में स्टाफ की कमी तथा इमारतों की मरम्मत पर कदम उठाने की बात कही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अभी ठोस कार्रवाई चाहिए। इस बीच सरकार ने आरोप लगाया है कि आंदोलन में कट्टर वामपंथी समूहों ने घुसकर हिंसा बढ़ाई, जबकि La France Insoumise यानी LFI के नेताओं ने इन आरोपों से इनकार किया है।France
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