INDIA & CHINA को सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने लगभग 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल कच्चा तेल देने की एक बड़ी डील पक्की की है।
न्यूज डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में मंडराते सुरक्षा खतरों के बीच भारत और चीन समेत पूरे एशियाई बाजार के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। कच्चे तेल के बढ़ते संकट को देखते हुए सऊदी अरब ने एशियाई देशों के लिए अपना तेल का खजाना खोल दिया है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने एशियाई खरीदारों को लगभग 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल कच्चा तेल देने की एक बड़ी डील पक्की की है।INDIA
क्या है 10 करोड़ बैरल का महा-सौदा?INDIA & CHINA
सऊदी अरामको द्वारा पक्का किया गया यह सौदा अक्टूबर और नवंबर के महीनों में सीधे एशियाई रिफाइनरियों तक पहुंचाया जाएगा। 10 करोड़ बैरल कच्चे तेल की यह मात्रा पूरी दुनिया की एक दिन की कुल खपत के बराबर है। होर्मुज के रास्ते आमतौर पर एशियाई देशों को सप्लाई किए जाने वाले तेल के मुकाबले यह मात्रा दोगुने से भी ज्यादा है। इस त्वरित आपूर्ति ने युद्ध के कारण संकट झेल रही एशियाई रिफाइनरियों में ईंधन की उपलब्धता को मजबूती प्रदान की है।
‘डोरस्टेप डिलिवरी’ और अरामको का जोखिमINDIA & CHINA
इस पूरी डील का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डोरस्टेप डिलिवरी (Doorstep Delivery) का फैसला है-
FOB नियम से बदलाव: सामान्य परिस्थितियों में खाड़ी देश ‘फ्री-ऑन-बोर्ड’ (FOB) आधार पर तेल बेचते थे, जिसमें खरीदार देश (जैसे भारत या चीन) को अपने टैंकर भेजकर तेल उठाना होता था और समुद्री रास्ते का सारा जोखिम खुद उठाना पड़ता था।
अरामको ने ली जिम्मेदारी: युद्ध के खतरे को देखते हुए खरीदारों के पीछे हटने पर अरामको ने खुद लॉजिस्टिक्स, जहाजों के भाड़े और समुद्री रास्ते की सुरक्षा का जोखिम उठाया।
मध्यस्थ कंपनियों की भूमिका: इराक की सरकारी तेल कंपनी ‘सोमो’ (SOMO) जैसे उत्पादकों के पास जहाजों का बड़ा बेड़ा न होने के कारण विटोल, टोटल-एनर्जीज, ट्राफीगुरा और एडनॉक (ADNOC) जैसी अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग कंपनियों ने आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने में सहयोग किया है।
होर्मुज के रास्ते सप्लाई और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइनINDIA & CHINA
सऊदी अरब के पास फारस की खाड़ी से लाल सागर तक जमीन के रास्ते तेल पहुंचाने के लिए ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ मौजूद है, जिससे होर्मुज के खतरनाक समुद्री रास्ते से बचा जा सकता है। हालांकि, 10 सितंबर को इस पाइपलाइन पर हुए हमले के कारण इसका संचालन अस्थायी रूप से बाधित हो गया था। मरम्मत कार्य के चलते सऊदी अरब को होर्मुज के रास्ते टैंकर भेजकर आपूर्ति शुरू करनी पड़ी। पाइपलाइन के पूरी तरह से बहाल होने के बाद सप्लाई लाल सागर के सुरक्षित मार्ग से होने लगेगी।
भारत और चीन के लिए राहतINDIA & CHINA
-यह आपूर्ति भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि:
-अमेरिका की नाकेबंदी के कारण ईरानी तेल की उपलब्धता प्रभावित हुई थी।
-पश्चिमी प्रतिबंधों के जोखिम के कारण रूसी तेल के उठान में सतर्कता बरती जा रही थी।
-अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे दूर-दराज के बाजारों से तेल खरीदने पर परिवहन लागत और भाड़ा काफी बढ़ गया था।
सऊदी अरब के इस कदम से भारतीय और चीनी रिफाइनरियों को ईंधन सुरक्षा का महत्वपूर्ण सहारा मिला है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन संकट और कीमतों में संभावित उछाल को रोकने में मदद मिलेगी।
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