उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद कांच उद्योग में मायूसी, अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद

Union Budget 2026: Disappointment in the Firozabad glass industry of Uttar Pradesh, struggling to survive

Union Budget 2026: कांच और चूड़ी उद्योग उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। रविवार 1 फरवरी को पेश हुए केंद्रीय बजट को लेकर उद्योग की प्रतिक्रिया मिली-जुली है। फिर भी उद्योग के ज्यादातर हितधारों में निराशा है। उनका कहना है कि अगर सरकार से कोई ठोस मदद या राहत पैकेज नहीं मिला, तो संघर्ष कर रहे कांच और चूड़ी उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा। Union Budget 2026

बेशक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बड़ी योजनाओं से विकास और निर्यात बढ़ने की कुछ उम्मीदें है, लेकिन कांच के बर्तन और चूड़ियां बनाने वाली इकाइयां कुछ और चाहती हैं। उनकी मांग है कि आयात शुल्क में कटौती हो, छोटे औद्योगिक क्लस्टर बनाए जाएं और प्राकृतिक गैस को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। लंबे समय से मंदी की मार झेल रहे कांच उद्योग की पकड़ अब विदेशी बाजार में भी कमजोर हो रही है। ऐसे में उद्योग केंद्रीय बजट से आगे बढ़कर कुछ और विकल्प तलाश रहा है। लेकिन फिलहाल उसे अपना भविष्य साफ नहीं, बल्कि धुंधले कांच की तरह दिख रहा है।  Union Budget 2026

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फिरोजाबाद के इंडस्ट्रियल एस्टेट एसोसिएशन अध्यक्ष बिन्नी मित्तल ने बताया कि बजट देश में रेल में, स्वास्थ्य में, काफी अच्छा आया है, लेकिन बात करते हैं अगर चूड़ी और कांच उद्योग की, तो हमारी झोली खाली रही। चूड़ी और कांच उद्योग को इस बजट में कुछ भी नहीं मिला। क्योंकि हमको उम्मीद थी कि हमारी चूड़ी और कांच उद्योग में नैचुरल गैस का उपयोग होता है, वो वैट के दायरे में आती है। अगर उसको जीएसटी के दायरे में कर देते तो उससे जो गैस है, उसकी कीमत कम हो जाती। तो हमारा उत्पादन जो है, वो सस्ता बनता।”

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