अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 43 पैसे गिरकर 95.61 पर हुआ बंद

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 43 पैसे गिरकर 95.61 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (risk aversion) का इस पर दबाव रहा।

फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि ग्लोबल मार्केट में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण USD/INR जोड़ी ने पिछले ट्रेडिंग सेशन में हुई बढ़त का ज्यादातर हिस्सा गंवा दिया। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया।

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में रुपया 95.35 पर खुला और इंट्राडे ट्रेड के दौरान डॉलर के मुकाबले 95.15 के उच्चतम और 95.75 के निचले स्तर के बीच कारोबार किया। घरेलू करेंसी आखिरकार 95.61 पर बंद हुई, जो पिछले बंद भाव से 43 पैसे की गिरावट है। शुक्रवार को, विदेशी पूंजी प्रवाह को समर्थन देने और फॉरेक्स लिक्विडिटी को मजबूत करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा उपाय घोषित किए जाने के बाद रुपया 56 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.18 पर बंद हुआ था। इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी की बास्केट के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.09 प्रतिशत बढ़कर 100.16 पर कारोबार कर रहा था। वहीं ईरान द्वारा इज़राइल की ओर कई राउंड मिसाइलें दागे जाने के बाद, ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स ट्रेड में 3.94 प्रतिशत बढ़कर 96.76 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

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घरेलू इक्विटी मार्केट के मोर्चे पर, सेंसेक्स 719.08 अंक गिरकर 73,524.26 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 243.70 अंक गिरकर 23,123 पर आ गया। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को नेट आधार पर 5,555.67 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। सोमवार को जारी रिज़र्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत ने 7.1 अरब अमेरिकी डॉलर या GDP का 0.7 प्रतिशत का चालू खाता अधिशेष (current account surplus) दर्ज किया। इसमें सेवाओं के निर्यात और अधिक रेमिटेंस (विदेशों से भेजी गई रकम) से मदद मिली।

2024-25 की चौथी तिमाही में यह अधिशेष 13.7 अरब अमेरिकी डॉलर या GDP का 1.4 प्रतिशत था। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए चालू खाता घाटा (current account deficit) 25.2 अरब अमेरिकी डॉलर या GDP का 0.6 प्रतिशत रहा, जबकि 2024-25 में यह 22.9 अरब अमेरिकी डॉलर या GDP का 0.6 प्रतिशत था।

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