Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया इकोनॉमिक सर्वे

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Delhi: बजट सत्र के दूसरे दिन आज संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया है।इस रिपोर्ट में भारत की अर्थव्‍यवस्‍था का ‘लेखा-जोखा’ रखा गया है। वही आम बजट 1 फरवरी को पेश होगा। वित्त मंत्री लोकसभा में 11 और राज्यसभा में 12 फरवरी को बजट पर चर्चा का जवाब देंगी।आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया गया है। यह दस्तावेज़ भारत की अर्थव्यवस्था का वार्षिक ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है, जो पिछले वित्त वर्ष के प्रदर्शन का विश्लेषण करता है और आने वाले समय की संभावनाओं पर प्रकाश डालता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा और राज्यसभा में यह सर्वेक्षण रखा। Delhi:

संसद में बजट सत्र के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 सदन के पटल पर पेश किया है। यह सर्वेक्षण अगले सप्ताह यानी 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से ठीक पहले आया है और देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का पूरा ब्यौरा देता है।मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन की देखरेख में तैयार इस सर्वेक्षण के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रथम अग्रिम अनुमान में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत और सकल मूल्य संवर्धन (GVA) वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे भारत चौथे लगातार वर्ष सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।Delhi:

अनंत नागेश्वरन,मुख्य आर्थिक सलाहकार- सर्वेक्षण में अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट कहती है कि मजबूत मैक्रो फंडामेंटल्स, निरंतर सुधार और निजी निवेश में सुधार के कारण भारत की संभावित वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत बनी हुई है। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ‘सतर्कता जरूरी है, निराशावाद नहीं’।इकोनामिक सर्वे के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्र मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। पहली छमाही में उद्योग का GVA वास्तविक आधार पर 7.0 प्रतिशत बढ़ा। मैन्युफैक्चरिंग में उच्च-मूल्य वाले सेगमेंट्स, PLI स्कीम और सेमीकंडक्टर मिशन जैसे कदमों से मध्यम-उच्च तकनीकी गतिविधियां अब कुल मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू एडेड का 46.3 प्रतिशत हैं।

बैंकिंग सेक्टर में भी सुधार दिखा – सितंबर 2025 तक GNPA मल्टी-डेकेडल न्यूनतम 2.2 प्रतिशत पर पहुंच गया। केंद्र का राजस्व प्राप्तियां GDP के 9.2 प्रतिशत तक पहुंचीं।सर्वेक्षण में सेवाओं और निर्यात पर भी जोर है। सेवाओं का निर्यात रिकॉर्ड 387.6 बिलियन डॉलर पहुंचा, 13.6% की वृद्धि के साथ। भारत वैश्विक मर्चेंडाइज निर्यात में अपनी हिस्सेदारी 1% से बढ़ाकर 1.8% कर चुका है।आर्थिक सर्वेक्षण में वैश्विक चुनौतियों जैसे भू-राजनीतिक तनाव, टैरिफ और सप्लाई चेन में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा गया है कि भारत ‘मैक्रो स्थिरता का ओएसिस’ बना हुआ है।

यानी दुनिया में आजकल बहुत अनिश्चितता, संकट, युद्ध, व्यापार युद्ध, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता है (जैसे रेगिस्तान), लेकिन भारत इसमें एक सुरक्षित, शांत और मजबूत जगह बना हुआ है — जहाँ अर्थव्यवस्था की बुनियादी चीजें अच्छी तरह काबू में हैं और स्थिर चल रही हैं।”यानी वैश्विक स्तर पर मुश्किलों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था एक “सुरक्षित आश्रय” या “स्थिरता का ठिकाना” जैसी है।शहरीकरण पर भी नई परिभाषा सुझाई गई है – आर्थिक और कार्यात्मक रूप से भारत आधिकारिक परिभाषा से कहीं अधिक शहरी है।बहरहाल यह आर्थिक सर्वेक्षण बजट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। अब सभी की निगाहें 1 फरवरी को वित्त मंत्री द्वारा पेश होने वाले बजट पर टिकी हैं।

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