पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के लिए एक बड़े कानूनी झटके के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राम रहीम को इस साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया था।
आपको बता दें, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने माना है कि राम रहीम के खिलाफ इस मामले में पर्याप्त सबूत नहीं थे। इसी के चलते राम रहीम को राहत मिली है, वहीं इस मामले के अन्य तीन आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन्हीं शूटरों ने 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या की थी।
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क्या था पूरा मामला ? जानिए
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अपने अखबार ‘पूरा सच’ में डेरा सच्चा सौदा के भीतर हो रहे यौन शोषण और अन्य संदिग्ध गतिविधियों को प्रमुखता से उजागर कर रहे थे। उन्होंने उस गुमनाम पत्र को भी प्रकाशित किया था, जिसमें एक साध्वी ने राम रहीम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके कुछ समय बाद, अक्टूबर 2002 में उनकी हत्या कर दी गई थी। छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने इस न्याय की लड़ाई को दो दशकों तक जारी रखा था।
जेल में ही रहेंगे राम रहीम
राम रहीम को भले ही इस मामले में बरी कर दिया गया हो, लेकिन वे फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। वे 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों के साथ बलात्कार के आरोप में 20 साल की सजा काट रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले मई 2024 में हाईकोर्ट ने उन्हें रणजीत सिंह हत्याकांड में भी सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
इस तरह एक के बाद एक दो बड़े हत्याकांडों (रणजीत सिंह और अब छत्रपति हत्याकांड) में राम रहीम का बरी होना सीबीआई की जांच और गवाहों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। अब माना जा रहा है कि CBI हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
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