Weather: देश में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप और लू की वजह से लोगों का हाल बेहाल है। भीषण गर्मी का सबसे बुरा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिनके पास इससे निपटने के जरिये कम हैं। शहरों में रहने वाले गरीब, बाहर काम करने वाले लोग, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। पूरे देश में तापमान बढ़ने के साथ पब्लिक हेल्थ, शहरी प्लानिंग और क्लाइमेट एक्शन के विशेषज्ञ- पैसिव कूलिंग जैसे समाधान पर जोर दे रहे हैं।
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पैसिव कूलिंग का मतलब है ऐसे उपाय जिनमें एनर्जी की जरूरत नहीं होती और जो सस्ते तरीकों पर निर्भर करते हैं, जैसे कि क्रॉस-वेंटिलेशन पक्का करना, छाया का इंतजाम करना और इमारतों को ठंडा रखने के लिए छतों पर चूने जैसे मटीरियल से पेंट करना। विशेषज्ञ बताते हैं कि भीषण गर्मी का लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और दूसरे कमजोर वर्गों को होता है।Weather
अलग-अलग संस्थाओं के अलावा, यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंट प्रोग्राम भारत के उन इलाकों में जहां गर्मी का असर सबसे ज्यादा होता है, वहां पैसिव कूलिंग के कई तरीकों को आजमा रहा है। इनमें कूल रूफ, इंसुलेशन और छाया की व्यवस्था करने से लेकर वेंटिलेशन और प्रकृति पर आधारित समाधान शामिल हैं। राजस्थान में पैसिव कूलिंग स्टेशन शहरी और सेमी-अर्बन बस्तियों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
ये बाहर के तापमान से 12 डिग्री तक ठंडे रहते हैं। अध्ययन से पता चलता है कि ये उपाय तापमान कम करने के अलावा, नींद में सुधार कर सकते हैं, थकान कम कर सकते हैं और प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकते हैं, जिससे लोगों को लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने में बेहतर मदद मिलती है।Weather Weather
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हालांकि, जानकार बताते हैं कि पैसिव कूलिंग उपाय भी मनचाहे नतीजे नहीं दे सकते। जानकारों का कहना है कि हीट एक्शन प्लान और हाउसिंग पॉलिसी में पैसिव कूलिंग के तरीकों को शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन वो ये भी चेतावनी देते हैं कि इन प्लान को सिर्फ कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए।Weather Weather
