Big News : 10 महीने में 14 आपत्तियां… चुनाव आयोग में आखिर किन मुद्दों पर आमने-सामने आए CEC और दोनों EC?

Big News

Big News : फॉर्म-6, वोटर डेटा, पश्चिम बंगाल की अपील और ECINet को लेकर चुनाव आयुक्तों ने दर्ज कराई आपत्तियां, चुनाव आयोग ने कहा- SIR समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए…

News Desk : चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी के बीच मतभेद को लेकर एक रिपोर्ट सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने, पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी अपीलों और चुनावी डेटा के तकनीकी प्रबंधन से था। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कहा कि फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। हालांकि, 23 सितंबर को चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों पर सफाई देते हुए कहा कि SIR सहित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।Big News

Read Also: International Relations: UN में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बहुपक्षवाद को मजबूत करने का किया आह्वान

सबसे बड़ा सवाल फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और वोटर डेटा तक अधिकारियों की पहुंच को लेकर उठा। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में नए मतदाताओं के फॉर्म-6 में SIR से जुड़ा सवाल जोड़ा गया। विवेक जोशी ने मई में इस तरह के बदलाव के लिए नियमों में संशोधन की जरूरत बताई थी और सुखबीर सिंह संधू ने भी इस राय का समर्थन किया था। बाद में संधू ने इस बदलाव को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताते हुए हटाने की मांग की। इसी तरह दोनों चुनाव आयुक्तों ने वोटर डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण पर चिंता जताई और ऑडिट की जरूरत बताई। रिपोर्ट में कहा गया कि ECINet जैसे तकनीकी सिस्टम में राज्यों के अधिकारियों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठे। गोवा में एक मामले में 97 मतदाताओं को ERO स्तर पर दस्तावेजों के आधार पर योग्य पाया गया, लेकिन सॉफ्टवेयर में उस फैसले को दर्ज करने का विकल्प समय पर उपलब्ध नहीं हो सका।Big News

Read Also: Rajya Sabha Elections: राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान! उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में चुनाव कार्यक्रम घोषित

पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी अपीलों का मुद्दा भी दोनों पक्षों के बीच सवालों का कारण बना। रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ट्रिब्यूनल के सामने करीब 38 लाख अपील लंबित हैं। इनमें 22.21 लाख अपील हटाए गए मतदाताओं की ओर से नाम बहाल कराने के लिए हैं, जबकि 16.10 लाख अपील उन मतदाताओं के खिलाफ हैं जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने सूची में शामिल किया था। सुखबीर सिंह संधू ने इन अपीलों को दाखिल करने की अनुमति और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के सभी फैसले नियमानुसार और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। 9 सितंबर को CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों की पूर्ण बैठक भी हुई थी, जो करीब चार महीने बाद हुई। ऐसे में सामने आई आपत्तियां और आयोग की आधिकारिक सफाई दोनों को साथ रखकर ही पूरे विवाद को समझा जा सकता है।Big News

Top Hindi NewsLatest News Updates, Delhi Updates, Haryana News, click on Delhi FacebookDelhi twitter and Also Haryana FacebookHaryana Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *