karnataka cm:कर्नाटक में 13 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की और भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बेदखल कर दिया। कांग्रेस ने चुनाव से पहले सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया था। ऐसे में चुनाव के बाद पूर्व CM सिध्दारमैया और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सीएम पद के लिए दावेदारी की थी। जिसके बाद आलाकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया था। चार दिन के मंथन और कई दौर की बातचीत के बाद भी नाम पर आम सहमति नहीं बन पाई थी।
सिध्दामैया कैसे पड़े भारी ?
कांग्रेस कर्नाटक में सबसे बड़े नेताओं में से एक हैं। उन्हें शुरुआत से ही सीएम पद के लिए लड़े डीके शिवकुमार से ज्यादा मजबूत दावेदार माना जा रहा था। सिध्दारमैया सिध्दारमैया ने अपने राजनीतिक जीवन में 12 चुनाव लड़े, इनमें से 9 में जीत हासिल की।
सिध्दारमैया सीएम रहे हैं। इससे पहले 1994 में जनता दल सरकार में कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री थे।उनकी प्रशासनिक पकड़ मानी जाती है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई मामला भी नहीं है। जबकि डीके शिवकुमार के खिलाफ कई मामले चल रहे हैं। वे जेल भी जा चुके हैं।
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सिध्दारमैया और डीके दोनों ही गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। सिद्दारमैया को 2008 में जेडीएस से कांग्रेस में लाने में मल्लिकार्जुन खड़गे की अहम भूमिका मानी जाती है। ऐसे में वे खड़गे के काफी करीबी बताए जाते हैं।
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