Ayodhya: उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। ऐसे में अयोध्या में राम मंदिर के अधिकारी भी रामलला की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठा रहे हैं। गर्मी में रामलला की मूर्ति को नुकसान न हो इसके लिए अलग से व्यवस्था की गई है।
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अधिकारियों के मुताबिक, मंदिर में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद, रामलला के कपड़े और गहनों का चुनाव गर्मी को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, रामलला के बाल स्वरूप के लिए देश भर से लाए गए मलमल और सूती कपड़ों का इस्तेमाल किया गया है। अयोध्या में इस वक्त भीषण गर्मी पड़ रही है। अधिकतम पारा 45 डिग्री के आसपास है। ऐसे में मंदिर के अधिकारी न केवल भक्तों की सुविधा का ध्यान रख रहे हैं, बल्कि भगवान राम की मूर्ति का भी खास ख्याल रखा जा रहा है।
ड्रेस डिजाइनर मनीष त्रिपाठी ने बताया कि भगवान की पोषाक में मलमल का प्रयोग खास तौर पर हो रहा है। मलमल कोटन पर जो तमाम हमारी इंडियन टेक्सटाइल हैं, जो इंडियन क्राफ्ट है उनको इस्तेमाल करके भगवान की पोषाक को सजाया जा रहा है। चाहे वो कलमकारी हो, चाहे वो पोचमपल्ली हो आपकी तेलंगाना-आंध्रा की, चाहे वो बंधेज-बांधनी हो, भुज से हो चाहे वो राजस्थान से हो या फिर वो शिबोरी, जो हमारे पास उत्तराखंड से आ रही है। या हमारे पास में वो चिकनकारी हो, जिस पर फाइन काम किया हो, धागे का काम किया हो।
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राम मंदिर ट्रस्ट कैंप कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता का कहना है कि ये रामलला का बालरुप है, बच्चों को गर्मी बहुत लगती है। निश्चित है कि उनको उसी हिसाब से पेय पदार्थ पिलाए जा रहे हैं। कपड़े भी उनको हल्के पहनाए जा रहे हैं, वस्त्र भी उनको हल्के पहनाए गए हैं। उनके जो श्रंगार के सामान हैं वो भी हल्के रखे गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि कम से कम उनकी ऊपर भार रहे। फूल माला वगैरह, हाथ का भी और उनको ठंडी से ठडी चीजें जो सामायिक होती है उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
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