Delhi: भारत अनेक भाषाओं की भूमि है, परंतु उसकी आत्मा एक है”- उपराष्ट्रपति

Delhi:  भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित 16 महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन किया। ये पुस्तकें तमिल के विख्यात विद्वानों, विरासत, वास्तुकला, साहित्य और संस्कृति को समर्पित हैं। विमोचित पुस्तकों में से 13 तमिल भाषा पर आधारित हैं।Delhi: 

तमिल शीर्षकों में रामेश्वरम, रामानुजार, नादुकल, अरिकाइमेडु, बक्ती इलक्कियाम, इयारकई वेलनमई, पजंथमिज़ान इसाई करुविगल, तमिझागा नत्तार देवंगल, पुधिया अरिवियाल थोझिलनुतपंगल, बंकिम चंद्र चटर्जी, मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर, तंजावुर पेरुवुदयार कोइल, मणिमेगलाई और महाविद्वान मीनाक्षी सुंदरम शामिल हैं।कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि विमोचित पुस्तकें मंदिर परंपराओं, दर्शन, साहित्य, संगीत और विज्ञान सहित तमिल विरासत की गहराई, विविधता और सभ्यतागत निरंतरता को दर्शाती हैं। तमिल को विश्व की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में से एक बताते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अनेक भाषाओं का घर होते हुए भी, उसकी आत्मा एक है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर तमिल को निरंतर सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की और युवाओं से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा पढ़ने का आग्रह करते हुए आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक शक्ति पर भी बल दिया।Delhi: 

पुस्तक विमोचन के अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त समृद्ध और प्राचीन संस्कृति वाली शास्त्रीय भाषा के रूप में तमिल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग की पुस्तकें इस गौरवशाली विरासत का जश्न मनाती हैं।इस कार्यक्रम में डॉ. एल. मुरुगन भी उपस्थित थे। उन्होंने तमिल संगम साहित्य के महत्व के बारे में बात की और एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को उजागर किया।इस कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण एस.के. बोस द्वारा लिखित बंकिम चंद्र चटर्जी की पुस्तक का अंग्रेजी, हिंदी और तमिल में विमोचन था। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रकाशित इस समृद्ध संस्करण में इस प्रख्यात साहित्यकार के जीवन और काल और भारतीय साहित्यिक आंदोलन में उनके योगदान का गहन अध्ययन किया गया है।Delhi: 

अंग्रेजी संस्करण में एक नया आवरण, अतिरिक्त अभिलेखीय तस्वीरें और चित्र शामिल हैं। इस आवरण को विशेष रूप से आईआईटी दिल्ली द्वारा समर्थित एक स्टार्टअप द्वारा डिजाइन किया गया है, जिसमें समकालीन सौंदर्यशास्त्र और शास्त्रीय भावना का अद्भुत मिश्रण है। हिंदी और तमिल अनुवादों के एक साथ विमोचन से वंदे मातरम के पूजनीय रचयिता की विरासत व्यापक पाठकों तक पहुंच गई है।रामेश्वरम पर आधारित यह पुस्तक पुराणों और साहित्यिक स्रोतों से प्राप्त दस्तावेजी संदर्भों को प्रस्तुत करती है, जिसमें रामेश्वरम मंदिर परिसर के पवित्र स्थलों, स्थापत्य कला की भव्यता, मूर्तियों और देवी-देवताओं का विस्तृत वर्णन किया गया है। इस पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को मंदिर के इतिहास और आध्यात्मिक महत्व की व्यापक समझ प्रदान करना है।Delhi: 

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