kerlam: वडक्कुनाथन मंदिर में ‘विलंबरम’ के साथ त्रिशूर पूरम उत्सव की हुई शुरुआत

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kerlam: त्रिशूर पूरम का उत्सव शनिवार सुबह श्री वडक्कुनाथन मंदिर में पारंपरिक ‘विलंबरम’ रस्म के साथ शुरू हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद इस मौके पर भारी भीड़ उमड़ी। जैसे ही मंदिर का दक्षिणी द्वार खुला, हाथी ‘एर्नाकुलम शिवकुमार’ पर सवार ‘नेयथलक्काविलम्मा’ ने ‘थेक्किंकाडु मैदान’ में प्रवेश किया। इसके साथ ही 36 घंटे तक चलने वाले इस उत्सव की आधिकारिक घोषणा हो गई। इस पल को देखकर वहां जमा हजारों लोगों ने ज़ोरदार जयकारे लगाए।kerlam

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‘विलंबरम’ रस्म पूरम उत्सव की औपचारिक घोषणा का प्रतीक है। नेयथलक्काविलम्मा की प्रतिमा को लेकर, एर्नाकुलम शिवकुमार ने दक्षिणी ‘नाड़ा’ (द्वार) खोला, जो इस उत्सव के आगमन का संकेत था। भक्त और उत्सव प्रेमी बड़ी संख्या में मंदिर के दक्षिणी ‘गोपुरम’ पर कतार में खड़े थे। वे इस औपचारिक घोषणा को देखने के लिए घंटों से इंतज़ार कर रहे थे।kerlam 

यह शोभायात्रा सुबह करीब 9 बजे नेयथलक्काविल से शुरू हुई और दोपहर 12:30 बजे तक मंदिर परिसर में पहुंच गई। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन के साथ हाथी के प्रवेश ने उत्सव के जोश को और बढ़ा दिया। हाथी प्रेमी और दर्शक इस रस्म को देखने और शिवकुमार की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में जमा हुए थे।kerlam

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त्रिशूर पूरम का मुख्य उत्सव रविवार को होना है। हालांकि, हाल ही में मुंडाथिकोड में हुई आतिशबाजी दुर्घटना को देखते हुए, प्रशासन ने उत्सव के कार्यक्रमों को सीमित करने का फैसला किया है। प्रशासन ने इस साल का पूरम बिना आतिशबाजी के मनाने का फैसला किया है। साथ ही, उत्सव के सबसे खास आकर्षणों में से एक ‘कुडमट्टम’ (छत्रों का आदान-प्रदान) को भी काफी हद तक सीमित कर दिया गया है। यह उत्सव मुख्य रूप से पारंपरिक रस्मों के रूप में ही मनाया जाएगा, जिसमें भव्यता और दिखावा कम होगा।kerlam

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