OM Birla: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि बाबासाहेब ने राष्ट्र को एक नई दिशा और नई दृष्टि दी और राष्ट्र निर्माण की एक सुदृढ़ नींव रखी।बिरला ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्थापित समानता, न्याय और सामाजिक परिवर्तन के सिद्धांतों को आज पूरा देश कृतज्ञता के साथ याद करता है। ओम बिरला ने यह विचार आज ‘अम्बेडकर जयंती’ के अवसर पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा आयोजित “सामाजिक न्याय से राष्ट्रीय विकास: डॉ. अम्बेडकर के सिद्धांतों पर आधारित विकसित भारत 2047” नामक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
बिरला ने कहा कि बाबासाहेब के विचार आज भी मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।बिरला ने कहा कि यदि राष्ट्र और समाज आने वाली पीढ़ियों में साहस, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और सेवा भावना का संचार करना चाहते हैं, तो उन्हें बाबासाहेब के आदर्शों को अपनाना होगा। बिरला ने विचार व्यक्त किया कि बाबासाहेब ने अपने जीवन से सिद्ध कर दिया कि व्यक्ति के सामने कितनी भी चुनौतियां या कठिनाइयां क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और स्पष्ट लक्ष्य सफलता की ओर ले जाते हैं। बिरला ने आगे कहा कि एक साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद बाबासाहेब ने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।बाबासाहेब ने विश्व में शिक्षा के उच्चतम स्तर प्राप्त किए, फिर भी व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं के बजाय राष्ट्र सेवा का मार्ग चुना।महिला सशक्तिकरण पर बाबासाहेब के प्रगतिशील दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए, बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की प्रगति के लिए महिलाओं के पास समान अधिकार और अवसर होने चाहिए।बिरला ने कहा कि आज पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी बाबासाहेब के उस विजन को दर्शाती है, जिनका सपना था कि समाज के हर वर्ग—विशेष रूप से वंचित और पिछड़े वर्गों—को न्याय और समान अधिकार मिलें।
बिरला ने कहा कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए गरिमा और अवसर सुनिश्चित करना बाबासाहेब के विश्व-दर्शन के केंद्र में था।बिरला ने आगे कहा कि यह हम सभी का उत्तरदायित्व है कि हम बाबासाहेब के विचारों को समाज के हर कोने तक पहुँचाएँ और शिक्षा के माध्यम से भावी पीढ़ियों को सशक्त बनाएँ। आज की तेजी से बदलती दुनिया में नवाचार, प्रौद्योगिकी और शिक्षा को अपनाने पर जोर देते हुए बिरला ने कहा कि राष्ट्र के विकास में योगदान देना ही बाबासाहेब को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।ओम बिरला ने आगे कहा कि बाबासाहेब ने न केवल भारत के संविधान का प्रारूप तैयार किया, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।बिरला ने कहा कि बाबासाहेब एक महान अर्थशास्त्री थे जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत की वित्तीय संरचना, औद्योगिक विकास और आर्थिक शक्ति के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की।बाबासाहेब ने श्रमिकों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और उनके लिए न्याय सुनिश्चित करने हेतु निरंतर कार्य किया।ओम बिरला ने कहा कि ऊर्जा, सिंचाई और शासन जैसे क्षेत्रों में बाबासाहेब के विचार आज भी प्रासंगिक हैं।
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक संविधान—भारत के संविधान—को बाबासाहेब के विजन और गहन चिंतन का परिणाम बताते हुए बिरला ने कहा कि संविधान के हर अनुच्छेद पर संविधान सभा में विस्तृत चर्चा हुई थी और बाबासाहेब ने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक निर्णय राष्ट्र की भविष्य की जरूरतों को प्रतिबिंबित करे। बिरला ने गर्व के साथ कहा कि बाबासाहेब ने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार, मतदान का अधिकार और न्याय की गारंटी दी और सत्ता जनता के हाथों में सौंपी।ओम बिरला ने कहा कि आज दुनिया भर में लोकतांत्रिक मूल्यों और समानता के सिद्धांतों को अपनाया जा रहा है, और इन्हें आकार देने में बाबासाहेब के विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
बिरला ने आगे कहा कि समानता, न्याय और बंधुत्व के बाबासाहेब के आदर्शों ने लोकतंत्र को मजबूत करने का मार्ग दिखाया है।इससे पूर्व, लोकसभा अध्यक्ष ने इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘बाल संविधान पुस्तक श्रृंखला’ का विमोचन किया और अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर बिरला ने कहा कि बाबासाहेब ने जनता को केंद्र में रखकर भारत के महान संविधान की रचना की थी। ऐसे में यह आवश्यक है कि देश का हर नागरिक संविधान के मूल्यों, इसके प्रावधानों और आदर्शों से परिचित हो। बिरला ने आगे कहा कि हर बालक अपनी शुरुआती शिक्षा से ही संविधान को जाने, समझे और उसका अध्ययन करे। इससे राष्ट्र की आने वाली पीढ़ी संवैधानिक मूल्यों से ओतप्रोत होगी, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होगी और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनेगी।
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