Women Reservation : महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जहाँ एक तरफ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर ‘परिसीमन’ के जरिए राजनीतिक चाल चलने का आरोप लगाया है और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की सड़कों पर महिला कांग्रेस ने जोरदार हल्ला बोला है।
कांग्रेस ने महिला आरक्षण को लेकर नई लड़ाई शुरू कर दी है।कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 2029 चुनाव में महिला आरक्षण को लागू करने को लेकर सरकार से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।वही महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा के नेतृत्व में महिला कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन कर सीधे तौर पर पूछा है कि जब कानून बन चुका है, तो इसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है?Reservation Women Reservation
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री पर तीखा प्रहार किया है।(Women Reservation) जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अप्रैल 2026 में घबराहट में अधिसूचित किया गया था।जयराम रमेश का दावा है कि सरकार का असली एजेंडा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन के जरिए अपना राजनीतिक संरक्षण करना था।जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष ने मांग की है कि 2029 के चुनावों में मौजूदा लोकसभा सीटों के साथ ही महिला आरक्षण लागू करने के लिए तुरंत सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।Women Reservation
वही महिला आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक की मांग के साथ ही महिला कांग्रेस सड़कों पर भी उतर आई है।दिल्ली में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा के नेतृत्व में विधानसभा का घेराव किया गया।यहां “महिला आरक्षण तत्काल लागू करो की नारेबाज़ी के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ पुतला दहन भी किया गया।अलका लांबा ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कानून 2023 में ही पारित हो गया था, तो अब तक इसे लटकाया क्यों जा रहा है? उन्होंने मांग की कि लोकसभा की 528 सीटों पर तत्काल आरक्षण प्रभावी किया जाए।Women Reservation
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प्रदर्शन में शामिल महिला कांग्रेस की महासचिव शिल्पी अरोड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी महिलाओं को हक न देकर देश को गुमराह कर रही है।प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक पारदर्शिता के साथ आरक्षण लागू नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। साफ है कि महिला आरक्षण का मुद्दा एक नया मोड़ ले चुका है।कांग्रेस ने एक तरफ नीतिगत चर्चाओं पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है, तो दूसरी तरफ महिला कांग्रेस ने सड़कों पर अधिकारों की लड़ाई छेड़ दी है।
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