केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत ने चालू वित्त वर्ष में वस्तु निर्यात को बढ़ाकर करीब 530 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो लगभग 16-17 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। गोयल ने नई दिल्ली में ‘व्यापार बोर्ड’ की बैठक में कहा कि सेवा क्षेत्र के निर्यात के लिए 2026-27 में लगभग 470 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है, जो करीब 11 प्रतिशत वृद्धि के बराबर है।
व्यापार बोर्ड एक ऐसा मंच है जहां केंद्र, राज्य, निर्यातक और उद्योग प्रतिनिधि देश के व्यापार को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा, “हम इस साल कुल निर्यात को एक लाख करोड़ डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। इसके लिए वस्तु निर्यात को 442 अरब डॉलर से बढ़ाकर करीब 530 अरब डॉलर करना होगा।”
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वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल निर्यात 863 अरब डॉलर रहा, जिसमें 442 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात और 421 अरब डॉलर का सेवा निर्यात था। गोयल ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वस्तु निर्यात में 15 प्रतिशत और सेवा निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, “हम लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और सही रास्ते पर हैं। लेकिन पतंग उड़ाते समय उसे कसकर पकड़ना पड़ता है, इसलिए इस लक्ष्य को सबके सामूहिक प्रयास से ही हासिल किया जा सकता है।”
वाणिज्य मंत्री ने उद्योग जगत से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के निर्माण पर ध्यान देने और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का लाभ उठाकर वैश्विक बाजार में अवसर तलाशने का आग्रह किया। गोयल ने कहा कि उद्योग को केवल घरेलू बाजार पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए। उन्होंने बताया कि वाणिज्य मंत्रालय का निर्यात संवर्धन मिशन विदेश में ब्रांडिंग, गोदाम स्थापित करने और वैश्विक प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए सहयोग देगा।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के साथ एफटीए के 15 जुलाई से लागू होने से भारतीय वस्तुओं को 99 प्रतिशत श्रेणियों में शून्य शुल्क पर पहुंच मिलेगी। इसके साथ यह भी कहा कि भारत 100 देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है और पिछले वर्ष 38,400 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड रक्षा निर्यात किया गया।
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वाणिज्य मंत्री ने निर्यात बढ़ाने के लिए सात बिंदुओं पर ध्यान देने की सलाह दी, जिसमें निर्यात को प्राथमिकता देना, ‘भव्य’ योजना में राज्यों की भागीदारी, डंपिंग के मामलों में डीजीटीआर की सेवाओं का उपयोग और वैश्विक प्रदर्शनियों में अधिक भागीदारी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए परीक्षण सुविधाओं की स्थापना में वित्तीय मदद भी देगी। उन्होंने राज्यों से अपनी औद्योगिक नीतियों को केंद्र के साथ समन्वित करने का आग्रह किया।
