भारतीय शूटिंग के आधार स्तंभ जसपाल राणा के असामयिक निधन से युवा प्रतिभाओं को क्षति

Jaspal Rana

​नब्बे के दशक में जब भारत में शूटिंग को एक प्रमुख खेल के रूप में नहीं देखा जाता था, तब जसपाल राणा ने देश में पिस्टल शूटिंग की क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) में कुल 15 पदक जीते, जिसमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। वे आज भी भारत के सबसे सफल राष्ट्रमंडल खेल एथलीटों में से एक थे।

आपको बता दें, 1994 के एशियाई खेलों (हिरोशिमा) में महज 18 साल की उम्र में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने तहलका मचाया। इसके बाद 2006 दोहा एशियाई खेलों में 3 स्वर्ण पदक जीतकर और विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करके उन्होंने इतिहास रचा। खेल में उनके शुरुआती और अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें 18 वर्ष की आयु में अर्जुन पुरस्कार और 21 वर्ष की आयु में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

Read Also: ओमान की खाड़ी में जहाजो पर US नेवी के अटैक में भारतीयों की मौत-विदेश मंत्रालय ने US चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया

द्रोणाचार्य के रूप में योगदान- आधुनिक दिग्गजों के शिल्पकार

एक महान खिलाड़ी होने के बाद, राणा ने खुद को एक कड़े, अनुशासित और ‘हाई-परफॉर्मेंस’ कोच के रूप में स्थापित किया। 2012 में जूनियर नेशनल पिस्टल प्रोग्राम की कमान संभालने के बाद उन्होंने भारतीय शूटिंग की पूरी पौध को बदल दिया। पेरिस ओलंपिक 2024 में मनु भाकर द्वारा जीते गए दो ऐतिहासिक कांस्य पदकों के पीछे जसपाल राणा का ही दिमाग और कठोर प्रशिक्षण था। टोक्यो ओलंपिक की निराशा के बाद मनु को मानसिक और तकनीकी रूप से फिर से चैंपियन बनाने का श्रेय राणा को जाता है।

उन्होंने सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे कई ‘टीन सेंसेशन’ को ग्रूम किया, जिससे भारत की जूनियर शूटिंग टीम विश्व स्तर पर एक महाशक्ति बनकर उभरी। खेल में उनके इस योगदान के लिए उन्हें 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा गया था। फरवरी 2025 में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने जसपाल राणा को 25 मीटर पिस्टल अनुशासन के लिए ‘हाई-परफॉर्मेंस कोच’ नियुक्त किया था। उनके अचानक चले जाने से युवा निशानेबाजों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।अब नए युवाओं को अब ऐसा ‘मेंटल मेंटर’ मिलना मुश्किल होगा।

Read Also: केंद्र सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन रूल्स 2026′ का ड्राफ्ट किया जारी, टीवी-रेडियो और इंटरनेट टीवी से जुड़े नियमों में होगा बड़ा बदलाव

जसपाल राणा अपने सख्त अनुशासन के लिए जाने जाते थे। आज की युवा पीढ़ी, जो सोशल मीडिया और शुरुआती स्टारडम के कारण कभी-कभी भटक जाती है, उसे ट्रैक पर रखने के लिए राणा का कड़ा रुख बेहद जरूरी था। भारत की जो युवा ब्रिगेड 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक और आगामी विश्व कप की तैयारी कर रही थी, उसने अपना सबसे भरोसेमंद मार्गदर्शक खो दिया है। “जसपाल राणा ने भारतीय शूटिंग को तब संभाला जब इसे एक वैश्विक पहचान की तलाश थी, और एक कोच के रूप में उन्होंने इसे ऐसा भविष्य दिया जो आने वाले दशकों तक पदक जीतता रहेगा।”

जसपाल राणा का जाना केवल एक पूर्व चैंपियन या कोच का जाना नहीं है, बल्कि उस ‘सिस्टम और विज़न’ का नुकसान है जिसने भारतीय निशानेबाजी को आत्मनिर्भर और आक्रामक बनाया। युवा निशानेबाजों के लिए उनकी कमी को पूरा करना NRAI और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। भारतीय शूटिंग के इतिहास में जब भी उन चेहरों की बात होगी जिन्होंने इस खेल को भारत में एक वैश्विक पहचान दिलाई, तो जसपाल राणा का नाम अग्रिम पंक्ति में आएगा।

Top Hindi News, Latest News Updates, Delhi Updates, Haryana News, click on Delhi Facebook, Delhi twitter and Also Haryana Facebook, Haryana Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *